मेयर उप चुनाव में प्रचार-प्रसार पर भाजपा के अशु वर्मा ने मात्र ढाई लाख रुपये खर्च किए। उनके सामने चुनाव लड़ रहे सपा प्रत्याशी सुधन रावत ने इस चुनाव में कुल आठ लाख रुपये खर्च किए थे।
अशु और सुधन ने अपने चुनाव खर्च का ब्योरा जमा करा दिया है, जबकि अभी भी 10 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होेंने अपना चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं दिया है। ऐेसे में अब इन सभी प्रत्याशियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मेयर उप चुनाव में 12 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे थे, लेकिन किसने कितना खर्च किया इसका हिसाब केवल दो प्रत्याशियों ने ही दिया है। खर्च का हिसाब विजेता प्रत्याशी अशु वर्मा और दूसरे स्थान पर रहे सुधन रावत ने ही दिया है।
इयहां तक कि राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के प्रत्याशी लालमन ने भी कोई हिसाब आयोग को नहीं दिया है। जिला कोषाधिकारी लक्ष्मी मिश्रा ने बताया कि मेयर उप चुनाव में आयोग द्वारा 12.5 लाख रुपये खर्च करने की राशि तय थी।
चुनावी मैदान में उतरे 12 प्रत्याशियों में से महज दो लोगों ने ही खर्चे का हिसाब दिया है। उन्होंने बताया कि अन्य प्रत्याशियों को कई बार नोटिस भी जारी किया जा चुका है, बावजूद इसके किसी ने भी खर्च का हिसाब नहीं दिया।
यहां तक कि राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस से चुनाव लड़े प्रत्याशी लालमन ने भी अपना खर्च जिला प्रशासन को नहीं बताया है। लक्ष्मी मिश्रा ने बताया कि चुनाव खत्म होने के एक माह तक प्रत्याशी द्वारा चुनाव प्रचार में होने वाले खर्च का हिसाब-किताब देना होता है।
नियम के मुताबिक चुनाव के दौरान भी प्रत्याशियों को अपने खर्चे की डायरी का सत्यापन करना होता है। उन्होंने बताया कि जिन प्रत्याशियों ने अपना ब्यौरा नहीं दिया है, उनके खिलाफ निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी।