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यमुना नदी उफनाई, गांवों में पानी घुसा

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घाटमपुर(कानपुर)। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बांधों से बेतवा और यमुना नदियों में छोड़े गए पानी से तहसील क्षेत्र में यमुना नदी उफान पर है। नदी के किनारे बसे कई गांवों के अंदर तक पानी पहुंच जाने से तहसील प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं, बाढ़ के पानी से खरीफ की सैकड़ों बीघे फसलें जलमग्न हो गई हैं।
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यमुना नदी के किनारे बसे गड़ाथा, कटरी-काटर, अमिरतेपुर, कोटरा-मकरंदपुर, बीरबल का अकबरपुर, मोंहटा, रामपुर, महुवापुरवा, असवारमऊ और समुही-भटपुरवा सहित अन्य गांवों के निवासियों ने बताया कि बीते दो दिनों से यमुना नदी लगातार उफान पर है।
बीते शनिवार की रात नदी का पानी गड़ाथा, मोंहटा, रामपुर, महुवापुरवा और असवारमऊ गांवों के अंदर तक पहुंच गया। जिसकी चपेट में आकर कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। गड़ाथा गांव की कई गलियों में पानी भर जाने से लोगों को भारी दिक्कत है।
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गांव निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य गीता सिंह चौहान, कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष गजेंद्र सिंह परमार, विजयभान सिंह, राजू दुबे, उमेश सिंह, हरिनरायण दुबे और राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके गांव की गलियों में कई-कई फिट पानी भर जाने से आने-जाने में समस्या है। वहीं, मवेशियों को पानी के बीच बांधना पड़ रहा है। बाढ़ के पानी में गांव के कई हैंडपंप भी घिर गए हैं लेकिन, लोग मजबूरी में उनसे पानी निकालकर घर के काम निपटा रहे हैं।
इधर, बाढ़ की सूचना पर रविवार की सुबह नायब तहसीलदार हरिश्चंद्र सोनी राजस्व टीम के साथ गड़ाथा गांव पहुंचे। उन्होंने घूमकर निरीक्षण किया और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। बताया कि बाढ़ की निगरानी के लिए संबंधित गांवों की बाढ़ चौकियों में टीमें तैनात की गई हैं। राजस्व लेखपाल प्रत्येक तीन घंटे में इसकी तहसील मुख्यालय में जानकारी दर्ज करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल नदी का बढ़ना रुक गया है। बताया कि बाढ़ के पानी से खरीफ की फसलों का नुकसान हुआ है। वहीं, पानी उतरने के बाद संबंधित गांवों में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग को सतर्क किया गया है।
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