मंगलवार को गजनेर थाना क्षेत्र के भरतपुर पियासी में गेहूं के खेतों लगी आग से हुए नुकसान के बाद बुधवार को गांव में सन्नाटा रहा। फसल जलने से गांव में लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले। लोग सुबह अपने खेतों गए और अपनी जली फसल देख कर बुरी तरह से रोने लगे। कई अग्निकांड पीड़ित किसान कर्ज कहां से चुकाएंगे कहकर रोने लगे।
वहीं बुधवार को क्षेत्रीय लेखपाल विनोद से अमरनाथ, सिद्धनाथ और राम सिंह की क्षति आकलन रिपोर्ट में नाम शामिल न कराने को लेकर नोंकझोंक भी हुई, जिसके बाद लेखपाल ने उनका नाम सूची में शामिल कर लिया। वहीं, अकबरपुर तहसीलदार राकेश कुमार ने बताया कि अभी किसानों को नुकसान का मुआवजा मिलने में एक दो दिन का वक्त और लग सकता है। उन्होंने कहा कि मुआवजा मंडी समिति को देना है।
बुधवार को अग्निकांड से पीड़ित काश्तकारों से फार्म भरवाए गए हैं, जिसे शुक्रवार को मंडी समिति को भेजे जाएंगे, जिसके बाद किसानों को मुआवजा मिल सकेगा। भरतपुर पियासी गांव के अग्निकांड के आधे से ज्यादा बटाईदार हैं, जिनका वास्तविक नुकसान हुआ। उन्होंने काश्तकारों से बटाई पर खेती लेकर फसल बोई, तैयार की लेकिन जब कटने का वक्त आया तो सबकुछ आग की भेंट चढ़ गया। असल नुकसान तो इन्हीं बटाईदारों का हुआ। लेकिन, इन्हें जमीन मालिक न होने के चलते मुआवजा नहीं मिल सकता।
गांव के ऐसे बटाईदारों के खाते में सिर्फ आंसू ही है। तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में कुल 31 काश्तकार ही मुआवजे के हकदार हैं, लेकिन इनमें 10 बटाईदार है। गांव के बटाईदार रामआसरे, रणवीर पुत्र छोटे सिंह, छोटेलाल, मैय्यादीन, जयप्रकाश, राम सिंह, छन्नूलाल, जगजीवन राम, रामसेवक, बृजभान आदि ने बताया कि हमारा नुकसान तो हो गया। हम तो बटाईदार है सरकार के पास हमें देने के लिए कुछ भी नहीं है।