क्षेत्र में गुरुवार को गोपाष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। श्रीकृष्ण गौशाला समिति की ओर से शोभायात्रा निकाली गई और भंडारे का आयोजन किया गया। जगह-जगह गो-पूजन किया गया और गायों को पकवान खिलाकर गोरक्षा का संकल्प लिया गया।
पंडित कौशल किशोर शुक्ल ने बताया कि भारत में आदिकाल से ही गाय के पूजन व सुरक्षा की परंपरा रही है और गाय को माता का दर्जा दिया गया है।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने गोरक्षा का व्रत लिया था और भगवान श्रीकृष्ण ने गो-चारण करके पूरी दुनिया को गोरक्षा संदेश दिया था। वेदों में गाय की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा गया है कि उसके रोम-रोम में 33 करोड़ देवताओं का वास होता है। वहीं गाय को कृषि के लिए उपयोगी और गोमूत्र को औषधि के रूप में भी मान्यता मिली है।
गौशाला में गायों का शृंगार कराया गया और हवन के बाद उनका पूजन किया गया। शोभायात्रा में गणेशजी, शंकरजी व राम-लक्ष्मण की झांकियां सजाई गईं और गायें भी शामिल रहीं। कमेटी के लोग रास्ते में प्रसाद वितरण करते रहे।
शोभायात्रा ने मुख्यमार्ग से रामलीला चबूतरा होते हुए गुप्तागली से नेतराम गली होकर वापस गौशाला तक भ्रमण किया। रास्ते में नागरिकों ने गायों का तिलक कर पूजन किया और पकवान खिलाए। शोभायात्रा के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया।
गोपाल यादव, प्रशांत शुक्ल, शांतिसोहन मित्तल, राजकिशोर अग्रवाल, दीपक पांडेय, अनुभव अग्रवाल, मुकेश पांडेय, दीपक बंसल, अनिल गोयल, रामचंद्र, अभिनव बंसल आदि ने प्रसाद परोसा। सिकंदरा प्रतिनिधि के अनुसार महिलाओं ने गायों का पूजन कर उनको पकवान खिलाए।