जिला एवं सत्र न्यायालय माती स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यू में चल रहे हत्या के मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वर्ष 1995 की इस घटना में अन्य दो आरोपियों को वर्ष 2001 में सजा सुनाई जा चुकी है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यू के एडीजीसी लाल मोहम्मद ने बताया कि रसूलाबाद थाना क्षेत्र के बड़ी कहिंजरी गांव निवासी वादी लालमन ने 12 सितंबर 1995 को थाना में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि उसकी बहन नन्ही देवी व भगवान बली की पुत्री गीता फर्रुखाबाद के देवीपुर गांव में एक परिवार में ब्याही है। वहां दोनों में घरेलू रंजिश को लेकर विवाद हो गया। रक्षाबंधन पर दोनों के गांव आने पर उसी बात पर फिर से नोकझोंक हो गई।
दोनों महिलाएं वापस ससुराल चली गई। 12 सितंबर की सुबह पांच बजे उसके पिता श्री राम, मां सुखदेई, भाई पंकज व दिलीप घर के बाहर चबूतरे पर सो रहे थे। मौका पाकर भगवान बली, विश्राम पुत्रगण बलदेव व रामशंकर पुत्र पंचम ने सो रहे सभी लोगों पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। चीख सुनकर वह व पड़ोसी कौशल किशोर दौड़े तो हमलावर मौके से फरार हो गए।
हमले में पिता श्रीराम व भाई पंकज की मौके पर मौत हो गई जबकि मां सुखदेई व भाई दिलीप गंभीर रूप से घायल हो गए। वादी ने भगवान बली, विश्राम व रामशंकर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यायालय में मामला आने पर कोर्ट ने 20 दिसंबर 2001 को आरोपी रामशंकर व विश्राम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। भगवान बली के फरार होने पर उसकी फाइल अलग कर दी गई थी।
31 दिसंबर 2008 को रसूलाबाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यू के न्यायाधीश कमलेश कुमार पाठक ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद उसे पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।