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कंस वध के साथ भीतरगांव में मेला शुरू

Thu, 03 Dec 2015 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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भीतरगांव कसबे में चल रहे श्रीकृष्ण लीला समारोह के समापन के साथ ही दस दिवसीय ऐतिहासिक मेला बुधवार की शाम से शुरू हो गया। लीला के अंतिम दिन कंस वध का मंचन किया गया।
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इधर, मेले में देर रात तक दुकानें सजाने का क्रम रहा। श्रीकृष्ण लीला समारोह और मेला कमेटी से जुड़े लोगों ने बताया कि कसबे में अगहन महीने की द्वितीया तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक (पांच दिवसीय) कृष्णलीला होती है। जबकि, अंतिम दिन सप्तमी तिथि को कंस वंध लीला के साथ ही सात दिवसीय मेला शुरू हो जाता है।

इस बार 27 नवंबर से श्रीकृष्ण लीला शुरू हुई थी। जबकि, 02 से 11 दिसंबर तक मेले का आयोजन किया गया है।
बुधवार को अंतिम दिन की लीला में पूरा कसबा श्रीकृष्ण के रंग में रंगा दिखाई दिया।

दोपहर बाद शुरू हुए नगर भ्रमण (शोभायात्रा) में भगवान श्रीकृष्ण-बलराम की घर-घर उतारी गई। उनका भोग लगाने के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

ग्वाल-बालों के साथ निकले भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। देर शाम शोभायात्रा कसबा स्थित पुलिस चौकी के सामने बने कंस मैदान में पहुंची, जहां कृष्ण और उनके भाई बलदाऊ ने कंस का वध किया। कंस वध का मंचन होते ही जनसमुदाय ने कृष्ण और बलराम के जयकारे लगाए।
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लीला कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप अवस्थी और मंत्री सर्वेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार की शाम से दस दिवसीय मेला शुरू हो गया है। मेले में आने वाले दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजा ली हैं।

गत दिवस शोभायात्रा के दौरान जेनरेटर का करंट लगने से हुई युवक की मौत के बाद बुधवार को (अंतिम दिन) की शोभायात्रा में बैंड-बाजे नहीं बजवाए गए। थानाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मेले में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया है।
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