कानपुर देहात। एक ओर मानदेय बढ़ाए जाने की खुशी और दूसरी नवीनीकरण न किए जाने से अनुदेशक चिंतित। जिले में सौ से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के अनुदेशकों का नवीनीकरण पिछले सत्र में नहीं किया गया था। इस वर्ष भी वहीं नियम लागू किया गया। इससे अनुदेशक नाराज हैं। वह इस मामले में कोर्ट की शरण लेने की तैयारी में हैं।
परिषदीय जूनियर स्कूलों में शैक्षिक स्तर सुधारने के लिए सौ से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में 2013 में अनुदेशकों की तैनाती की गई थी। इसके बाद जिले में उन विद्यालयों में अनुदेशकों का नवीनीकरण नहीं किया गया जिसमें सौ से कम छात्र संख्या थी।
पिछले सत्र में अधिकारियों ने उन्हें छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कहा था। कई जगह छात्र संख्या बढ़ने के बाद भी नवीनीकरण न किए जाने की बात सामने आई। आदर्श अनुदेशक वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक अनुराग गुप्त ने कहा कि अन्य जिलों में नवीनीकरण में छात्र संख्या की बाध्यता लागू नहीं की गई है जबकि इस जिले में अधिकारी मनमानी करते हुए छात्र संख्या की बाध्यता लागू कर रहे हैं।
छात्र संख्या की बाध्यता होने से 79 विद्यालयों के अनुदेशक नवीनीकरण से वंचित रह गए। बैठक में अनुदेशकों ने मानदेय बढ़ाकर 17 हजार किए जाने पर मुख्यमंत्री का अभार जताया। वहीं, नवीनीकरण की लड़ाई के लिए रणनीति तय की। एसोसिएशन मामले को कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहा है। इस मौके पर पुष्पेंद्र सिंह, अमित शर्मा, राहुल राजपूत, धर्मेंद्र पाल, धर्मेंद्र दुबे, पूजा शुक्ला, ऋषभ बाजपेई आदि मौजूद रहे।