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रेलवे अफसर नहीं चाहते यात्रियों को मिले ताजा खाना

Tue, 30 Jul 2013 01:57 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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चलती ट्रेन के यात्रियों को ताजा और सफाई के बीच पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की योजना को खुद रेलवे के बड़े अफसर लागू नहीं करना चाहते हैं।
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यहीं कारण है कि 20 हजार यात्रियों को रोजाना गुणवत्ता वाला खाना मुहैया कराने के लिए लखनऊ और वाराणसी स्टेशनों पर बेस किचन बनाने के रेलवे के प्रस्ताव को तीन साल में भी रेलवे बोर्ड से मंजूरी नहीं मिल सकी है।

बेस किचन बनने से ट्रेनों में कैटरिंग का ठेका लेने वाली चंद बड़ी निजी कम्पनियों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए यह प्रस्ताव रेलवे बोर्ड में अटका हुआ है।

लम्बी दूरी की मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में खानपान सेवा का जिम्मा निजी कम्पनियों के पास है। इनमें कुछ बड़ी कम्पनियों के साथ रेलवे बोर्ड और जोनल मुख्यालयों के चंद रेलवे अधिकारियों का शेयर होने के आरोप समय-समय लगते रहे हैं।
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जिन कम्पनियों के साथ रेलवे अफसरों के नाम जुड़ रहे हैं उनके पास सबसे अधिक खानपान ठेका है। घटिया खाना बेचने के साथ ही यात्रियों से अधिक दाम वसूलने के दर्जनो मामले अब तक सामने आ चुके हैं।

इसे देखते हुए उत्तर रेलवे ने लखनऊ और वाराणसी स्टेशनों पर अपने ही विभाग का बेस किचन बनाने का निर्णय लिया था। रेलवे के बेस किचन में भारतीय रेलवे खानपान व पर्यटन निगम लि. (आईआरसीटीसी) के विशेषज्ञ रसोईयों की तैनाती कर अच्छी गुणवत्ता का भोजन मुहैया कराया जाना था।

इन दोनों बेस किचन से रोजाना करीब 20 हजार थाली खाना तैयार करने की योजना थी। इनमें से वाराणसी के बेस किचन से लगभग पांच हजार और लखनऊ के बेस किचन से 15 हजार थाली भोजन तैयार करने का प्रस्ताव भेजा गया था।

लखनऊ और वाराणसी में बेस किचन के लिए स्थान भी चिन्हित कर दिए गए। लखनऊ में चारबाग स्थित मुख्य रेल आरक्षण केंद्र के ऊपर वाले हिस्से में बेस किचन केलिए जगह का आंवटन भी कर दिया गया।
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तत्कालीन वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक और अब उत्त्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने ही बेस किचन बनाने के लिए रेलवे बोर्ड स्तर तक कड़े प्रयास किये थे।
रेलवे बोर्ड ने अब तक बेस किचन बनाने की योजना स्वीकृत नहीं की है।
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