गंगा और यमुना के जलस्तर में आए उफान से इलाहाबाद और वाराणसी समेत कई जिलों में हाहाकार मचा हुआ है। इलाहाबाद में दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से एक मीटर से ज्यादा ऊपर बह रही हैं।
उधर, वाराणसी में खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर जाने के बाद गंगा मंगलवार तड़के स्थिर हो गई। शहर का दिल समझे जाने वाले गोदौलिया चौराहे तक पानी पहुंचने से कारोबार पर असर पड़ा।
बलिया में हालात बेकाबू होने पर वहां जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स) बुलाने की तैयारी कर ली है। मिर्जापुर के चील्ह और सीखड़ इलाके में तीन लोग गंगा में बह गए।
इलाहाबाद में मंगलवार को गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 24 और छतनाग में 21 सेंटीमीटर घट गया जबकि यमुना के जलस्तर में 26 सेंटीमीटर कमी दर्ज की गई। जलस्तर में भले ही कमी आने लगी हो लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति अब भी काफी खराब है।
103 गांवों के साथ शहर में 17 मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं। उधर, वाराणसी में गंगा में आए उफान से शीतला घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट की सौ से अधिक दुकानें हटा ली र्गइं। देर रात तक जलस्तर 72.630 मीटर पर स्थिर रहा।
बलिया में दुबे छपरा का रिंग बांध टूटने से 25 हजार से ज्यादा लोग घिरे हुए हैं। गंगा के साथ टोंस और मगई नदियों के बेकाबू होने से जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ बुलाने के लिए पत्र भेजा है। मिर्जापुर में बाढ़ से 400 गांव प्रभावित हैं।
चील्ह और सीखड़ इलाके में एक बच्चे समेत तीन लोग बाढ़ में बह गए। गोताखोरों ने बालक और अधेड़ के शव को तो खोज निकाला लेकिन वृद्धा की तलाश देर शाम तक जारी थी।
गाजीपुर के तटवर्ती इलाकों की सड़कों के डूबने से 80 से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है। शहर में भी कई जगहों पर सड़कें लबालब हैं। चंदौली के पड़ाव क्षेत्र में जीटी रोड पर बाढ़ का पानी आने से भयावह स्थिति बनी रही। भदोही में भी बीते 24 घंटों में करीब पांच सौ एकड़ जमीन कटान की भेंट चढ़ गई।