उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव-गृह आरएम श्रीवास्तव, स्टाम्प व रजिस्ट्रेशन बृजमोहन मीणा और फैजाबाद के अपर आयुक्त (प्रशासन) शैलेन्द्र कुमार सिंह सहित कई अफसरों को हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी खासी महंगी पड़ी।
कोर्ट ने आला अफसर बृजमोहन मीणा, फैजाबाद के अपर आयुक्त एसके सिंह, बस्ती के बीएसए मनभरनराम राजभर, बेसिक शिक्षा निदेशालय के अफसर दल सिंह यादव, यूपी जल निगम के मुख्य लेखाधिकारी अजय जौहरी और नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा गौतम को तो न्यायिक हिरासत में लेते हुए तीन दिन के लिए जेल भेजने के आदेश दे दिए।
प्रमुख सचिव-गृह आरएम श्रीवास्तव को कड़ी फटकार सुननी पड़ी। मंगलवार सुबह सवा दस बजे हाईकोर्ट पहुंचे श्रीवास्तव को शाम तक कोर्ट में ही रुकना पड़ा। बिना शर्त माफी मांगने पर ही उन्हें राहत मिल पाई।
वहीं, जेल जाने से बचने केलिए मीणा, एसके सिंह, भरनराम राजभर, दल सिंह यादव, अजय जौहरी और अध्यक्ष प्रतिभा गौतम को बिना शर्त माफी मांगने केसाथ 10-10 हजार रुपये मुआवजा भी देना पड़ा।
अदालत ने कड़ी टिप्पणियां करते हुए कहा कि अफसरों ने जानते-बूझते कोर्ट को गुमराह किया। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इन अफसरों के खिलाफ दायर अलग-अलग अवमानना याचिकाओं पर मंगलवार को सख्त आदेश पारित किए।
प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव को अदालत ने आरोपों का जवाब दाखिल करने का समय देकर 8 मई को सुबह सवा दस बजे तलब किया है। श्रीवास्तव ने इसके पहले अदालत में अर्जी पेश कर बिना शर्त माफी मांगी। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई बुधवार के लिए मुल्तवी कर दी।
न्यायमूर्ति डॉ. सतीश चंद्र ने यह आदेश प्रदेश के पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की अवमानना याचिका पर दिया। इसमें याची ने वाई श्रेणी की सुरक्षा वापस न लिए जाने तथा जेड श्रेणी की सुरक्षा देने पर गौर करने के निर्देश संबंधी पहले पारित आदेश का पालन राज्य सरकार द्वारा न किए जाने का आरोप लगाया था।
उधर, श्रीवास्तव की तरफ से अर्जी देकर मामले की सुनवाई किसी अन्य तारीख पर नियत किए जाने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कोर्ट के आदेशों की अवमानना के अन्य मामलों में प्रमुख सचिव स्टाम्प व रजिस्ट्रेशन बृजमोहन मीणा, फैजाबाद के अपर आयुक्त (प्रशासन) एसके सिंह, बस्ती के बीएसए मनभरनराम राजभर, बेसिक शिक्षा निदेशालय के अफसर दल सिंह यादव, यूपी जल निगम के मुख्य लेखाधिकारी अजय जौहरी और नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा गौतम को पहले हिरासत में लेकर तीन दिन के लिए जेल भेजने के आदेश दिए।
लेकिन बाद में इन अफसरों द्वारा माफी मांगने व भविष्य में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना न करने का वचन देने पर कोर्ट का रुख नरम हुआ। कोर्ट ने इन सभी पर दस-दस हजार रुपये बतौर मुआवजा लगाते हुए इनके खिलाफ अवमानना के नोटिस रद्द कर दिए। अदालत ने इन अफसरों को रिहा करने के भी आदेश दिए। कोर्ट ने यह आदेश गिरीश चंद्र, विष्णुदत्त तिवारी व अन्य की याचिकाओं पर दिए।
अपर आयुक्त ने हाईकोर्ट के स्टे को ही कर दिया स्टे
अकबरपुर तहसील के दाखिल खारिज के एक मामले में फैजाबाद मंडल के अपर आयुक्त (प्रशासन) एसके सिंह ने हाईकोर्ट के स्टे पर ही स्टे लगा दिया और दस्तावेज तलब कर लिए। इसके खिलाफ अवमानना याचिका पर उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें कोर्ट के स्टे की जानकारी नहीं थी।
सात मई कोर्ट ने उन्हें फिर अदालत में तलब कर पहले उन्हें तीन दिन के लिए जेल भेजने का आदेश दिया बाद में शाम चार बजे दस हजार रुपये के जुर्माने पर रिहा कर दिया।
प्रमुख सचिव गृह ने इरादतन तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा और कोर्ट की अवमानना की है। उन्हें निर्देश दिया जाता है कि घंटे भर में वह ये बताएं कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना कानून 1971 की धारा 12 के तह क्यों न कार्रवाई की जाए।--न्यायमूर्ति डॉ. सतीश चंद्र।