टूंडला। भारी बारिश और हथिनीकुंड बैराज से 21 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यमुना जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। रविवार को यमुना का जलस्तर करीब तीन फीट और बढ़ गया, जिसके चलते यमुना खादरों में खड़ी किसानों की फसलें डूब गई हैं। अचानक बढ़ते जलस्तर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
तटवर्ती किसान रविवार की सुबह यमुना की ओर गए तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए। यमुना के किनारे के कई खेतों में बाजरा, मक्का, ज्वार और सब्जियों की फसलें पूरी तरह से पानी में डूब चुकी थीं। रसूलाबाद के किसान रामेश्वर दयाल ने बताया, खादर के खेत में खड़ी बाजरे की फसल में पानी भर गया है। इसी फसल से परिवार का गुजारा होता है। अगर अगले दो-तीन दिनों तक पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो हमारी पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
बजहेरा निवासी किसान रामखिलाड़ी और सरमन सिंह ने भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यमुना में पानी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसलों के नुकसान का डर सता रहा है। किसान लगातार यमुना के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही डूब रहीं फसलों को कच्चा ही काटकर पशुओं का चारा बना रहे हैं। किसानों का कहना है कि बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण यमुना उफान पर है।
इन गांवों के किसान होंगे प्रभावित
शनिवार रात्रि से लगातार बढ़ रहे जलस्तर से रुधऊ मुस्तकिल, नगला केशों, अनवारा, जटपुरा, रसूलाबाद, बालमपुर, बजहेरा, ठार रामगढ़, नगला काले, कुतकपुर साहब, ग्वारई, नगला राजपति, नगला गाढ़े, नियामतपुर व ठार डेका, नगला मूसटा समेत करीब दो दर्जन गांव के किसान चिंतित है। किसानों ने बताया कि अगर इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो उन्हें भारी नुकसान होगा।