दिसंबर माह का एक सप्ताह भी बीत गया। लेकिन गर्म कपड़ा बाजार में रौनक नहीं आई है। कारण पिछले वर्षों की तुलना में ठंडक न होना है। लोगों को गर्म कपड़ों की जरुरत ही नहीं पड़ रही। इसके चलते कारोबारी खासे परेशान हैं। कारोबारियों के मुताबिक, ब्रिक्री में गिरावट की बड़ी वजह है कि जब तक सर्दी का एहसास नहीं होता, तब तक लोग गर्म कपडे़ खरीदने में उत्सुक नहीं रहते। यदि एक सप्ताह में ठंड ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो उन्हें घाटा उठाना पडे़गा।
दुकानदार बोले उठाना पडे़गा नुकसान
बिक्री में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सर्दियों के लिए कपड़ों का जो स्टॉक हमने मंगवाया है, वह 10 फीसद भी नहीं बिका है। यदि अगले एक सप्ताह में ठंड नहीं बढ़ी तो हमें घाटा उठाना पडे़गा। अभी तक सीजन सुस्त चल रहा है।
सुरेश जैन, कपड़ा व्यापारी, सदर बाजार
पिछले वर्ष नवंबर- दिसंबर में गर्म कपड़ों की जमकर बिक्री हुई थी। लेकिन इस साल ग्राहकों का टोटा दिख रहा है। अभी तक कारोबार सहालग की वजह से पता नहीं चला। लेकिन एक सप्ताह में सर्दी नहीं बढ़ी तो बहुत घाटा होगा।
मनीष, कपड़ा व्यापारी
शास्त्री मार्केट
बुजुर्ग बोले दिसंबर में पड़ती थी कड़ाके की ठंड
70 वर्षीय महेश शंकर दुबे बताते हैं कि दिसंबर माह में तो कड़कड़ाती सर्दी पड़ती थी। लेकिन इस साल तो सर्दी का कोई एहसास नहीं हो रहा है। यह प्रकृति का अधिक दोहन करने का नतीजा है।
करीब 52 साल के श्रीलाल का कहना है कि बरसात से लेकर ठंड का कोई अता-पता नहीं रहता। दिसंबर के आठ दिन बीत गए, लेकिन लोगों ने स्वेटर पहनना तक शुरू नहीं किया।