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पवन का शव रखकर लगाया जाम, बवाल

Sun, 27 Sep 2015 11:42 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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फीरोजाबाद। थाने की हवालात में फांसी लगाकर जाने देने वाले पवन के मामले में एसएसपी को लीपापोती भारी पड़ गई। देर रात मुकदमा लिखने के बाद कार्रवाई न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने शव रखकर धरना शुरू कर दिया। न्याय की गुहार को महिलाएं भी सड़क पर उतरी और जाम लगाया। पवन का शव 19 घंटे रखा रहा। ग्रामीण आरोपी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग कर रहे थे। बवाल बढ़ता देख एसएसपी पीयूष श्रीवास्तव बैकफुट पर आ गए और आरोपी पांचों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद परिवारीजनों ने पवन के शव का अंतिम संस्कार किया।
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 बता दें कि पुलिस उत्पीड़न के चलते शनिवार सुबह करीब आठ बजे नारखी थाने की हवालात में पवन पुत्र रुकमपाल सिंह यादव निवासी साहूमई थाना फरिहा ने शर्ट से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। दोपहर करीब 12 बजे परिजनों को जानकारी हुई तो वह जिला अस्पताल पहुंचे। कोतवाल नारखी ध्यान सिंह, कोतवाल फरिहा श्रवण कुमार राना, नारखी थाने में तैनात उपनिरीक्षक डीपी सिंह, एचसीपी अवधेश और सिपाही जगदीश के खिलाफ हत्या का मामला तो दर्ज हुआ, लेकिन निलंबन की कार्रवाई नहीं की। इसको लेकर ग्रामीण और पीड़ित परिजनों में आक्रोश भड़क गया और उन्होंने पवन का अंतिम संस्कार नहीं किया। फीरोजाबाद के हथवंत और मुस्तफाबाद रोड पर जाम लगाकर नारेबाजी की गई। पुलिस प्रशासन की लापरवाही को लेकर कोआपरेटिव में सचिव रहे मृतक के ताऊ पदम सिंह ने सपा राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव से फोन पर वार्ता कर पूरे मामले से अवगत कराया। तब कहीं जाकर एसएसपी पीयूष श्रीवास्तव ने कोतवाल फरिहा, नारखी, उपनिरीक्षक, एचसीपी और सिपाही को निलंबित कर ग्रामीणों को अवगत कराया। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोलकर पवन के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

पुलिस से नहीं न्याय मिलने की उम्मीद
पवन के शव का अंतिम संस्कार करने के बाद ताऊ पदम सिंह ने कहा कि उनका भतीजा कोई अपराधी नहीं था फिर पुलिस ने उस पर पशु चोरी का आरोप लगाते हुए तमंचे में गिरफ्तारी कैसे दिखा दी। इसकी जांच के लिए वह उच्चाधिकारियों से मिलकर सीबीआई जांच कराने की मांग करेंगे। स्थानीय पुलिस प्रशासन से उनको न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। परिवारीजनों को मुआवजा मिलना चाहिए।
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खुफिया विभाग के उपनिरीक्षक से अभद्रता
गांव के हालात और ग्रामीणों के बीच होने वाली चर्चाओं पर नजर रखने के लिए गांव पहुंचे खुफिया विभाग के उपनिरीक्षक विक्रम सिंह को महिलाओं ने अभद्रता करते हुए दौड़ा लिया। इससे वह बेहोश होकर गिर गए। वहां मौजूद एक जनप्रतिनिधि उनको अपनी कार में डालकर वहां से ले गए।

सुभाष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की होगी पहल
पवन की बहन रेखा यादव का कहना था कि उसके बड़े भाई करन के ससुर सुभाष पुलिस में होमगार्ड हैं। उसकी तैनाती फरिहा थाने में है, जबकि वह पूर्व में नारखी थाने में रहते थे। वह अपनी बेटी के नाम खेत कराने के लिए पवन का उत्पीड़न करने के साथ ही धमकी भी दिया करते थे। इस घटनाक्रम में वह भी दोषी हैं। इसलिए उसके खिलाफ भी हत्या का मामला दर्ज हो।

गांव में नहीं जले चूल्हे
पवन का शव गांव पहुंचते ही चीखपुकार मच गई। चूल्हे ठंडे पड़े रहे तो ग्रामीणों में पुलिस प्रशासन के प्रति आक्रोश था। डीएम एसएसपी गांव तक नहीं आए इसे लेकर भी लोगों में उबाल था। रविवार सुबह करीब चार बजे एसपी देहात संजय सिंह गांव पहुंचे थे, इससे पूर्व कोई भी अधिकारी नहीं आया।

सतीश की हत्या की तरह इसे भी दबाना चाहती थी पुलिस
रामगढ़ थाना क्षेत्र में वृद्ध को छत से फेंकने और उसकी मौत के जिम्मेदार पुलिस कर्मियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने आरोपी पक्ष को दबाव में लेकर मामले को दबा दिया। मामले की जांच रामगढ़ एसओ प्रवेश कुमार को ही दे दी। एसएसपी पीयूष श्रीवास्तव की कार्यप्रणाली आरोपियों की तैनाती वाले थाने में जांच में निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती है। इसी तरह पुलिस इस मामले में लीपापोती करनी चाहती थी। थाने के हवालात में मौत के बाद दो इंस्पेक्टर को तत्काल निलंबित न किया जान पीड़ित पक्ष के हौसले तोड़ने जैसा ही है।
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