फिरोजाबाद के नसीरपुर के करनपुर गांव के एक बुजु्र्ग दंपती ने जिंदगी की राहों पर दशकों तक एक-दूसरे का हाथ थामकर चलने के बाद मौत के आगोश में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त 77 वर्षीय सुभाष चंद्र के देहांत के महज 12 घंटे बाद, उनके विरह का असहनीय दर्द न झेल पाने के कारण 70 वर्षीया पत्नी भजनत्री की भी सांसें थम गई।
गांव करनपुर निवासी सुभाष चंद्र वर्ष 2009 में दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके कुछ समय बाद वे पैरालाइसिस की बीमारी की चपेट में आ गए थे। पिछले कई वर्षों से वे बिस्तर पर थे, और उनकी जीवनसंगिनी भजनश्री साये की तरह दिन-रात उनकी सेवा और देखभाल में जुटी रहती थीं। सोमवार को लंबी बीमारी के चलते सुभाष चंद्र ने अंतिम सांस ली।
सुभाष चंद्र के शांत होते ही घर में कोहराम मच गया, लेकिन सबसे गहरा आघात उनकी जीवनसंगिनी भजनश्री को लगा। वे पति के पार्थिव शरीर के पास गुमसुम बैठी रहीं और उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पति वियोग सहन न कर सकीं और तबीयत बिगड़ने के कुछ देर बाद दम तोड़ दिया। परिजन उन्हें आनन-फानन शिकोहाबाद के संयुक्त चिकित्सालय ले गए, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें भी मृत घोषित कर दिया।