फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलभराव से बढ़ रहे मच्छर, नहीं जागा स्वास्थ्य विभाग

Tue, 09 Aug 2016 11:02 PM IST
Amar Ujala
विज्ञापन
जलभराव से बढ़ रहे मच्छर, नहीं जागा स्वास्थ्य विभाग - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
बरसात के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। गली-मुहल्लों एवं जिला अस्पताल परिसर में स्थाई जलभराव मलेरिया, डेंगू एवं फाल्सीफेरम जैसी बीमारियां को बढ़ावा देने के लिए काफी है। फिर भी विभाग नींद में है। फागिंग एवं दवा छिड़काव कराना विभाग ने शुरू नहीं कराया है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल परिसर में बने तलैया से मरीजों को और बीमार होने का खतरा मंडराता रहता है। जलेसर रोड़ पर बने खत्ताघर से बीमारियां पनपने की आंशका है। मगर मलेरिया विभाग ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कराए हैं। मलेरिया वार्ड भी नहीं बनाया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया के इलाज और जांच का कोई इंतजाम नहीं है।

मलेरिया के लक्षण
सामान्य तौर पर संक्रमण होने के 10 दिन बाद मलेरिया के लक्षण आते हैं। ठंड लगकर बुखार आना, सरदर्द, बदन दर्द, भूख न लगना, खून की कमी, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैरों में ऐंठन आदि इसके लक्षण हैं।
विज्ञापन


इस तरह करें बचाव
- मच्छरदानी लगाकर सोएं
- दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाएं
- फुल कपडे़ पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढका हो
- कूलर में पानी बदलते रहें। पानी को एकत्रित न होने दें

जिला अस्पताल में मच्छरों का प्रकोप
जिला अस्पताल में मच्छरों का प्रकोप है। यहां इलाज कराने वाले लोगों को और मलेरिया, डेंगू होने का खतरा मंडराता है। वार्ड नंबर एक और बर्न वार्ड के पीछे स्थाई तालाब बना है। नालियों एवं बरसात के पानी से मच्छर बढ़ जाते हैं।

क्या कहते हैं लोग
जिला अस्पताल में भर्ती नवलकिशोर कहते हैं कि यहां मच्छर काफी लगते हैं। पीछे तलैया भरी हुई है जिससे यहां मच्छर पनपते हैं।
- गांव मढई की श्रीमती देवी के परिवारीजन बर्न वार्ड में भर्ती हैं। वे कहती हैं कि मच्छरों का प्रकोप इतना है कि रात में सोना मुश्किल है। इधर, उधर घूमकर रात गुजारनी पड़ती है।
- ककरऊ कोठी से जुडे़ क्षेत्र में जलभराव रहता है। क्षेत्रीय निवासी रामकिशन ने कहा कि गंदा पानी भरा है, इसलिए मच्छर और बढ़ गए। कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं।
- जलेसर रोड़ खत्ताघर के सामने कपडे़ की दुकान चलाने वाले जयवीर सिंह ने कहा कि खत्ताघर से बरसात में बुरी हालत हो जाती है। मच्छर और बदबू बढ़ जाती है।

मलेरिया हो तो तुरंत लें परामर्श
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अजय अग्रवाल कहते हैं कि जरूरी नहीं है कि मलेरिया, डेंगू ठंड लगने से आए। अगर बुखार ज्यादा दिन तक हो तो उसकी टेस्टिंग करा लें। झोलाछाप डाक्टरों के चक्कर में न पडे़। स्वच्छता का ध्यान रखें।

अस्पताल में नहीं प्लेट्लेट्स का इंतजाम
सरकारी महकमें में डेंगू के इलाज का कोई इंतजाम नहीं है। प्लेटलेट्स मिलने का कोई इंतजाम नहीं है। मरीजों को प्राइवेट ब्लड बैंक या आगरा के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है। वहीं, जिला अस्पताल में मलेरिया कार्ड से जांच नहीं किया जाता। जिससे चिकित्सकों को रिपोर्ट पर भरोसा कम रहता है।

क्या कहते हैं अधिकारी
मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू के इलाज के लिए सभी अस्पतालों को निर्देशित किया जा चुका है। जिला अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी स्तर पर टेस्टिंग कार्ड पहले से ही उपलब्ध है। जहां नि:शुल्क जांच एवं इलाज किया जाता है। सूचना मिलने पर स्वास्थ्य टीम क्षेत्र में तुरंत पहुंचेंगी।
डॉ. केके गुप्ता, जिला नोडल मलेरिया कार्यक्रम अधिकारी

प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच
-जिला अस्पताल के सामने स्थित आस्था पैथोलॉजी के स्वामी डॉ. ओपी सिंघल के मुताबिक मलेरिया की जांच सौ रुपये में की जाती है। डेंगू की जांच 450 रुपये में कार्ड से करते हैं।
विज्ञापन

- सेवार्थ संस्थान ट्रामा के अध्यक्ष पीके जिंदल के मुताबिक मलेरिया की 130 रुपये में जांच की जाती है। डेंगू की जांच 310 रुपये में होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें