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घर-घर होनी चाहिए वाटर हार्वेस्टिंग, बंद बोरिंग से बढ़ाएं जल स्तर

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गांधीपार्क मैदान में कुछ सालों पहिलें बनाया गया था वाटर रीचार्ज वेल। अमर उजाला - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। जलसंचयन विषय पर सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शहर के जागरूक लोगों ने अपने सुझाव रखे। जल संचयन के क्षेत्र से जुडे़ लोगों ने भूगर्भ में बारिश का पानी छोड़ने के उपाय भी बताए।
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जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जिले में 167 शीतगृह हैं और अब सभी को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना होगा। तभी लाइसेंस का नवीनीकरण होगा। पूरे वर्ष में औसत 650 एमएम बारिश होती है। इस बारिश के जल का प्रति एक हजार वर्गफुट 80 हजार लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। एक हजार फीट तक से आवास में मात्र 25 हजार की लागत से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा सकते हैं।
बोरिंग से वाटर रीचार्ज बेल बनाने की तैयारी
शहर के प्रमुख साहित्यकार और जागरूक नागरिक डा. रामसनेही लाल शर्मा ने अपने निजी प्रयासों और संसाधनों से खराब हो चुके सरकारी हैंडपंप की बोरिंग प्रयोग करके सात साल पहले वाटर रीचार्जिंग बेल बनाया था। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रयोग शहर के सभी खराब हैंडपंप की बोरिंग में किया जा सकता है। जलकल अभियंता एमएल वर्मा ने कहा कि वह स्वयं दो बार डा. शर्मा के प्रयोग को देखने गए थे। शहरी क्षेत्र में 1415 हैंडपंप के बोर फेल हो गए हैं। अपर नगर आयुक्त चंदन सिंह ने भी बंद पडे़ बोर में वाटर रीचार्जिंग बेल बनाने की बात कही।
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विभाग करे सहयोग हम कराएंगे कार्यशाला : राजीव अग्रवाल
वर्ष 2013 में शिकोहाबाद में औद्योगिक क्षेत्र स्थित पूजा डिटर्जेंट इकाई में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर समाजसेवी राजीव अग्रवाल ने उद्योगों को जल संचयन की राह दिखाई। तत्कालीन डीएम संध्या तिवारी ने उन्हें पर्यावरण मित्र से सम्मानित किया था। राजीव अग्रवाल बताते हैं कि उनके यहां के जलस्तर और उनकी फैक्टरी से कुछ दूरी पर जलस्तर में दस फीट का अंतर है। विभाग सहयोग करे वह अपने यहां किसानों और आमजनों के साथ बड़ी कार्यशाला कराने को तैयार हैं।
पाठ्यक्रम में शामिल हो जलसंरक्षण का विषय
समाजशास्त्री डा. यूएस पांडेय बोले योजना को धरातल पर लाने के बाद सबसे बड़ी जरूरत मानीटरिंग की है। जल संचयन का विषय बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल होना चाहिए। भूगोल विषय से जुडे़ एसआरके इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. डीपीएस राठौर ने कहा कि पानी की बर्बादी तभी रोकी जा सकती है जब जैसे बिजली मीटर से मिलती है उसी तरह पानी भी मीटर से मिले। शहर के प्रमुख आर्किटेक्ट अनुराग उपाध्याय ने कहा कि ऐसे कई उपाय हैं जिनसे बारिश का पानी भूगर्भ में छोड़ा जा सकता है।
कुल उपलब्ध पानी का 82.6 प्रतिशत पानी खेती में प्रयोग होता है। खेती में पानी की बर्बादी रोकने के लिए पीएम कृषि सिंचाई योजना में ऐसे प्रावधान हैं जिनका प्रयोग करके 70 प्रतिशत तक पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है वहीं कम पानी की खपत कर पैदावार अच्छी की जा सकती है। जिले में 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल होती है। इस फसल में सबसे अधिक पानी खपत होता है। आलू किसानों को टपक योजना से सिंचाई करनी चाह्रिए।
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- विनय कुमार यादव, जिला उद्यान अधिकारी
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