फिरोजाबाद। एक दशक से सूखे पडे़ बंबा में अब पानी आने लगा है। बंबा अभी क्षतिग्रस्त है इसलिए पानी क्षमता से कम छोड़ा गया है। जल्द ही पूरा पानी छोड़ा जाएगा। फिरोजाबाद बंबा हाथरस ब्रांच से जुड़ा है। ककरऊ कोठी से दौलतपुर तक बंबा करीब एक दशक से सूखा पड़ा था। विधायक मनीष असीजा ने सिरसा और सैंगर नदी की सफाई के साथ इससे जुडे माइनर और बंबों की सफाई का प्रस्ताव जनपद के प्रभारी मंत्री राजेंद्र सिंह उर्फ मोती सिंह के पास भेजा था।
इस पर प्रभारी मंत्री ने इस पूरी योजना पर सफाई का काम मनरेगा से कराने के निर्देश प्रशासन को दिए थे। प्रशासन ने सिंचाई, ग्राम पंचायत और स्थानीय निकायों की मदद से नहर और बंबों का सफाई का काम शुरू कराया। इस बंबा की क्षमता 200 क्यूसेक पानी की है लेकिन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है इस लिए अभी 125 क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया है।
हाथरस ब्रांच टेल से फिरोजाबाद बंबा तक पानी आ रहा है। हाथरस ब्रांच से फिरोजाबाद बंबा तक 75 किलोमीटर क्षेत्र है। इस पूरे क्षेत्र में माइनर कई जगह से क्षतिग्रस्त है। जीर्णोद्धार के लिए शासन ने 26 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर कर दी है। इससे माइनर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। -मनीष असीजा, विधायक
एटा और मैनपुरी जनपद की सीमा तक सफाई से मिला पानी को रास्ता
नारखी ब्लाक क्षेत्र में एटा की सीमा से सटे गांव से लेकर दूसरी ओर मैनपुरी जनपद की सीमा से सटे सिरसागंज क्षेत्र तक सिरसा और सैंगर नदियों की सफाई की गई। अब रजावली और नारखी धौकल का तालाब भी इसी माइनर से आने वाले पानी से भरा जा रहा है।
किसान बोले फसलों के लिए अमृत है बंबा का पानी
यह बंबा करीब 12 से अधिक गांवों को जोड़ता है। किसानों का कहना है कि बंबा का पानी फसलों के लिए अमृत के समान होता है। नलकूप और सबमर्सिबल से जहां पांच बार पानी लगाना होता है। बंबा के दो बार पानी से ही फसल पूरी तरह से पककर तैयार हो जाती है।
1.दौलतपुर निवासी किसान रमेश चंद्र का कहना है कि बंबा में पानी आने से फसलों की सिंचाई करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
2.ककरऊ कोठी निवासी किसान राजेंद्र का कहना है अभी तक निजी सबमर्सिबल से खेतों में पानी लगाते थे। बंबा किनारे पड़ी अपनी भूमि पर ही पानी के लिए मशीन लगा ली है। इससे फसलों में पानी लगाने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
3.दौलतपुर निवासी किसान जयवीर सिंह का कहना है कि पुलिया चोक पड़ी है। इसलिए पानी की प्रवाह प्रभावित हो रहा है। 20 वर्ष पूर्व रजवाहा में पांच से छह फीट पानी रहता था। यदि इसी तरह पानी रहता तो किसान जमीन बेचने के लिए विवश नहीं होता।