श्रुत सेवा निधि न्यास का वार्षिक समारोह अक्षाभिषेकोत्सव का आयोजन पालीवाल हॉल में रविवार को किया जाएगा। समारोह में लेखक और कवियों को सम्मानित किया गया। मुंबई से आए फिल्म निदेशक और विद्वान डॉ. युगराज जैन ने युवतियों को संस्कार दिए। उन्होंने Òबहना तुमसे कुछ कहनाÓ शीर्षक से उपस्थित समूह को संबोधित किया।
समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. युगराज जैन, विश्वदीप सिंह, संस्थापक प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर की। इस दौरान मंचासीन अतिथियों ने चार अलग-अलग कृतियों का लोकार्पण किया। रचियता को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. युगराज ने युवतियों ऊर्जावान बनाने के लिए कविताओं एवं वाक्यों को समझाया। उन्होंने कहा कि Òबेटियों खुद पर चिंतन करना, गलत फैसला तुम मत करनाÓ। दोस्त ऐसा ढूंढना जो पानी दे, ऐसा नहीं तेजाब बने। तेजाब दोस्त खुद को जलाएगा ही, परिवार को भी नुकसान पहुंचाएगा।’ उन्होंने कहा कि मां-बाप अपने लाड़लों को पैगाम पहुंचाएं कि संस्कारों से इतना कीमती बन जाओ कि कोई अमीर सौदा नहीं कर पाए। चंद्रवीर जैन ने अपनी कृति के बारे में बताया कि हनुमानजी के बारे में सबको पता है, लेकिन उनकी मां अंजनी और पिता पवन के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए उन्होंने यह कृति लिखी। उद्योगपति बालकृष्ण गुप्त ने कहा कि संस्थाओं को धन देना आसान है, लेकिन उसका सदुपयोग सही मायने में श्रुत न्यास करता है। जरूरतमंद ऐसे लोग, जो हाथ नहीं फैला सकते। उन्हें इस न्यास से मदद मिलती है। संस्थापक प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन ने कहा कि न्यास छोटा पौधा था लेकिन आज एक वृक्ष बन गया है। अक्षरों के पुजारियों का यह न्यास सम्मान करता है। संचालक वरिष्ठ अधिवक्ता अनूपचंद्र जैन एडवोकेट ने कहा कि न्यास इस प्रकार का आयोजन लगातार करता रहेगा। अध्यक्षता कर रहे विश्व दीप सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान संजय जैन पीआरओ, विजय देवता, अजय जैन, कुलदीप जैन मित्तल, कुलदीप जैन आदि उपस्थित रहे।
इन कृतियों का हुआ लोकार्पण
- डॉ. पंकज मिश्रा के सुबोध ग्रंथ Òभगवान महावीर एवं उनके शैक्षिक विकासÓ
- डॉ. चंद्रवीर जैन द्वारा लिखित ‘चंदना उत्तार्थÓ,
- पंडित रामस्वरूप शास्त्री की कृति ‘भजनावली’
- अनूपचंद्र जैन एडवोकेट द्वारा लिखित ‘बाहुबलि स्तवन’