भैया दूज पर भाइयों के घर तक पहुंचने के लिए बहनों को बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। सफर काफी मुश्किलों भरा रहा। वाहनों की तलाश में बहनें भटकती रहीं। सिंगल रूटों पर घंटों इंतजार के बाद भी प्राइवेट वाहनों से सफर करना पड़ा। बस एवं आटो संचालकों ने निर्धारित किराया से अधिक पैसे वसूले किए। अधिक किराया देकर भी वाहनों में आराम से बैठने को भी जगह नहीं मिली। ट्रेनें में यात्रियों को खिड़कियों पर लटककर सफर तय करना पड़ा।
भैया दूज पर बहनों की भीड़ पांच बजे से बस स्टेंड एवं रेलवे स्टेशनों पर दिखी। हर किसी को भाई के घर पहुंचने की जल्दी थी। एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद एवं इटावा के लिए सरकारी बसें नहीं होने के कारण प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी बसों को लगा दिया। हालात यह थे कि बस एक मिनट में ही हाउसफुल हो जाती थीं। सुभाष तिराहा,आसफाबाद चौराहे से दौड़ने वाले प्राइवेट वाहनों पर भारी भीड़ रही। यह मक्खनपुर, शिकोहाबाद, सिरसागंज कठफोरी तक दौड़ रहे थे। उसायनी, टूंडला, एत्मादपुर एवं आगरा तक प्राइवेट वाहनों से लोग सफर तय कर रहे थे। यही स्थिति सरकारी बसों की थी। लंबी रूट की बसें तो हाउसफुल होकर आ रहीं थी। यहां के यात्री उनकी छतों पर सफर तय करने को विवश थे। रेलवे स्टेशन पर सुबह कानपुर पैसेंजर एवं फर्रुखाबाद की ओर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन तो फीरोजाबाद फुल होकर पहुंची। साढ़े नौ बजे आगरा लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन, मूरी, कालका, तूफान एवं कटिहार एक्सप्रेस की जनरल बोगी में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। रिजर्वेशन वाले कोच में बैठने को मजबूर थीं। फीरोजाबाद से जलेसर, कोटला फरिहा एवं एका, फीरोजाबाद मटसेना एवं फतेहाबाद रूटों पर भी बसों में भारी भीड़ रही। यात्रियों से 20 रुपया के स्थान पर 30 तो कहीं 80 रुपया की जगह 100 एवं 120 रुपया तक किराया देना पड़ा।
बसों के साथ खूब दौड़े टैपों
सिंगल रूटों पर बसों में भीड़ होने का फायदा टेंपो संचालकों ने उठाया। आटो चालक जहां कोटला फरिहा तक यात्रियों को लेकर जा रहे थे वहीं मटसेना रोड पर मटसेना - फतेहाबाद तक सवारियों को ढो रहे थे। शाम को वक्त इसी तरह की स्थिति रही।
अधिक वसूला किराया
बाजार में चलने वाले बैटरी चलित रिक्शा चालकों ने भी किराया बढ़ा दिया। जिस स्थान के पांच रुपया किराया वसूल रहे थे वहां के दस रुपया वसूल किए। कहीं बीस तो कहीं लोगों ने पूरा रिक्शा ही बुक कर लिया। छोटे रिक्शा तो 20 रुपया से कम पर सवारी ले जाने को तैयार नहीं थे।
पुलिस कर्मियों ने उठाया लाभ
बस स्टेंड एवं प्राइवेट वाहनों के यात्रियों के बैठने के दौरान चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी सक्रिय रहे। उन्होंने बस के 200 रुपया चक्कर तो छोटे वाहनों से 50 से सौ रुपया प्रति चक्कर तक वसूल किया। मनमाने किराए पर खूब सवारी मिलने के कारण वाहन चालक सुविधा शुल्क देने में कोई गुरेज नहीं कर रहे थे।