सलाखों में भाई को देख बहनों की आंख से छलके आंसू
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जेल की सलाखों के पीछे भाई के माथे पर तिलक करने पहुंची बहनें भाई को देख फफक-फफक कर रोने लगी। भाइयों ने उन्हें धैर्य दिलाने का प्रयास किया, तो बहनें स्वयं अपने आंसू को पोंछने लगी।
भाई दूज के लिए जेल प्रशासन ने पूर्व में तैयारियां कर ली थी। मिलाई का दौर सुबह आठ बजे से शुरू हो गया, जो दोपहर बाद तक चला। इस दौरान करीब 1500 से अधिक बहनें भाई के माथे पर तिलक करने के लिए जेल में पहुंची। बहनों को केवल गिरी का गोला ले जाने की अनुमति दी गई।
वहीं मिष्ठान जेल के अंदर से ही खरीदना पड़ा। विभिन्न अपराधों के आरोप में जेल के अंदर बंद भाइयों को बहनों ने सलाखों से बाहर आता देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलकने लगे। कुछ भाई के सीने से लिपट कर रोने लगी, तो कुछ भाई को हिम्मत देने के अपने आंसुओं को रोकने का प्रयास करती नजर आईं। रक्षाबंधन पर अव्यवस्था को देखते हुए इस बार जेल प्रशासन ने खास इंतजाम किए थे। इससे इस बार बहनों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा।