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अच्छे दिनों का इंतजार, तकलीफों ने किया बेजार 

Sat, 19 Nov 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,फीरोजाबाद
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पुराने नाेट ‌द‌िखाता क‌िसान - फोटो : अमर उजाला
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शहर हो या गांव, नोटबंदी का असर व्यापक है। कारोबार चौपट हैं। कारखाने बंद हैं। मजदूरों को काम नहीं, चूल्हे ठंडे पड़े हैं। बाजार से छोटी करेंसी गायब होने लगी हैं। दो हजार का नोट भुनाना चुनौती बन गया है। जिनकी जेब में बाजार में चल रही मुद्रा है उसे वह अति आवश्यक कामों पर ही खर्च कर रहे हैं। बैंकों में व्यवस्थाएं बेपटरी हैं। कहीं ‘करेंसी नहीं है’ का बोर्ड टंगा है तो कहीं लंबी लाइन है। नोटबंदी को दस दिन बीत गए लेकिन एटीएम पूरी तरह से चालू नहीं हो पाए हैं। 1000- 500 के नोट के बंद होने का शुरू में समर्थन करने वाले भी परेशानी झेलकर गुस्सा में हैं लेकिन भविष्य में कुछ अच्छा होने की उम्मीद से भी हैं। अमर उजाला की टीम ने नोटबंदी पर शहर से लेकर गांवों तक लोगों के बीच जाकर उनके मन की बात को जानने की कोशिश की तो अधिकांश चेहरों पर अच्छे दिनों की उम्मीद में तकलीफों को मुस्करा कर झेलने की मजबूरी नजर आई। 
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मुउद्दीन वाले रास्ते पर बाइक से खाद लेकर आ रहे अजय उर्फ छोटू बोले कुछ परेशानी अभी आ रही है लेकिन कुछ दिन बाद सब ठीक हो जाएगा। इसी गांव में सैयद बाबा की मजार के सामने बने मंदिर के चबूतरे पर बैठे गांव के कुछ लोग ताश खेल रहे थे। संजय, मोहनलाल, राकेश और पूर्वप्रकाश ने कहा कि सब काम बंद हैं। हम तो मजदूर हैं, कहां जाएं। समय काटने के लिए ताश खेल रहे हैं। 

जलेसर रोड पर परचून की दुकान करने वाली ओमवती बोली सब पांच सौ को नोट ला रहे हैं कन्तै खुले दें...ग्राहक लौट जावत हैं। पांच का नोट हाथ में लिए बैठे चंद्रपाल की तरफ इशारा  करते हुए बोलीं, जै बाबा हू सौदा खरीदवे आए हैं..पांच को नोट दिखावत हैं हमने सौदा न दई..। चंद्रपाल बोले सबरो घर छान मारो तब एक जै पांच सौ नोट निकरौ है, जातै हू कई दिन काटने हैं पर बाजार में सामान तौ मिले, कब तक उधार लेवें। 
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गांव पचवान में स्टेट बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र पर लाइन में लगी बहीदन बेगम काफी परेशान थीं। तीन दिन से उसके घर में चूल्हा नहीं जला है। घर में सब मजदूरी करते हैं और सभी की मजदूरी मिला कर पांच-पांच के नोट के रुप में उनके पास हैं। लेकिन इन नोटों से उसे कहीं कोई सामान नहीं मिल रहा है। हर रोज बैंक की लाइन में लगती हैं जब तक नंबर आता है करेंसी खत्म हो जाती है। 

एका के लोगों ने भी मुसीबतों को देखा
एका। बैंक ऑफ इंडिया के बाहर चार दिन से कतार में लगे लोगों को कैश नहीं मिला। देवेंद्र नगला सुखी परेशान दिखे। वहीं सुशीला जेड़ा का कहना है पैसे के अभाव में बच्चे को खाना तक नहीं बना पाते हैं। हरीसिंह पुर निवासी गंगा देवी के दामाद की तबियत खराब है। लेकिन पैसा नहीं मिल रहा है। नगला भूड़ निवासी वीना देवी के घर खाने तक को पैसा नहीं। कसबा निवासी तनु एका,राधिका एका, नीलम को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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