अफसर इतने बेखबर हैं कि जिस कार्यालय में वह घंटों बैठते हैं उसमें ही अग्निशमन के उपाय नहीं है। हादसा कभी हो सकता है। एआरटीओ कार्यालय, बिजली विभाग, कलक्ट्रेट, और विकास भवन सहित कई कार्यालयों का हाल यह है कि जरा की स्पार्किंग इमारत को आग की लपटों में झोंक सकती है।
आगरा में एलआईसी की इमारत में आग लगने से मंडल के पेंशनर्स की फाइलें आग की भेंट चढ़ गईं। इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फीरोजाबाद में अधिकांश सरकारी कार्यालय ऐसे हैं जहां आग की घटना से बचने के उपाय की जगह रिर्काउ का ऐसे रखा गया है कि आग लगे तो रिकार्ड ही सबसे पहले जले और आग को भड़का दे। आवास विकास कालोनी में स्थित कई कार्यालयों में वायरिंग काफी पुरानी, भवन जर्जर हैं। फाइलों का तो अंबार लगा है। भूमि संरक्षण अधिकारी चतुर्थ कार्यालय भवन की वायरिंग खुली है। एआरटीओ कार्यालय में फाइलों को रखने तक की जगह नहीं है, कार्यालय में खुली वायरिंग के नीचे ही फाइलों का ढेर रखा है। यहां स्पार्किंग होते ही फाइलें आग के हवाले होने में देर नहीं लगेगी। कलक्ट्रेट में स्थित सहायक निबंधक कार्यालय हो या पूर्ति विभाग, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जमा हुए लाखों आवेदन फार्मों का ढेर खुली वायरिंग के समीप है। पंचस्थानीय निर्वाचन कार्यालय का हाल भी कमोवेश यही है। विकास भवन में स्थित अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग के स्टाफ के बैठने तक की जगह नहीं है। यहां भी फाइलें एवं बिजली की वायरिंग में कोई दूरी नहीं है। वाणिज्यकर विभाग में तो एक बार आग की घटना हो चुकी है इसके बाद भी सबक नहीं लिया है। रेलवे फाटक के समीप स्थित बिजली कार्यालय में बिजली के तार, फाइलें भी आग को भड़काने का कारक बन सकते हैं।