छोटे भाई ने बुधवार रात अंतिम सांस बड़े भाई राजेंद्र की गोद में ली। इसके बाद से बड़े भाई सुध-बुध खो बैठे। परिजन कृपाल के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तभी बृहस्पतिवार सुबह सदमे में डूबे राजेंद्र घर से निकले और ट्रेन के आगे कूद गए।
बीमारी से बुधवार रात छोटे भाई की मौत के बाद बृहस्पतिवार सुबह बड़े भाई ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। दोनों मटसैना थाना क्षेत्र के गांव दौंकेली के रहने वाले थे। इस घटना से पूरे गांव शोक है। मृतक राजेंद्र उर्फ राजू (48) और कृपाल (40) अविवाहित थे और साथ ही रहते थे। दोनों चूड़ी जुड़ाई का काम करते थे।
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लोगों का कहना है कि दोनों भाई साथ जिए और साथ ही दुनिया से चले गए। जिस घर में कल तक दोनों भाई साथ बैठकर खाना खाते थे, आज वहां मातम की चीखें हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाई एक-दूसरे के लिए खुद खाना बनाते थे। दस दिन से कृपाल सिंह फेफड़ों में संक्रमण के कारण बीमार थे। बुधवार रात को उन्होंने अंतिम सांस बड़े भाई राजेंद्र की गोद में ली। छोटे भाई का निर्जीव शरीर देख राजेंद्र सुध-बुध खो बैठे। जिस भाई के साथ उन्होंने पूरी जिंदगी का सुख-दुख बांटा, उसका जाना उन्हें इतना गहरा घाव दे गया कि उन्होंने जीने की इच्छा त्याग दी।
परिजन कृपाल के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तभी बृहस्पतिवार सुबह सदमे में डूबे राजेंद्र घर से निकले और ट्रेन के आगे कूद गए। एक ही दिन में दो भाइयों की मौत की खबर से गांव में चूल्हे नहीं जले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों भाइयों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजन के सुपुर्द किया।
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पांच भाइयों में तीन की मौत, अब दो ही जीवित
दौंकेली के ज्ञान सिंह के पांच बेटे थे। इनमें रमेश सबसे बड़े थे, जिनकी पांच साल पहले कैंसर से मौत हो चुकी है। रमेश की पत्नी और एक बेटा, बेटी सैलई गांव में घर बनाकर रहते हैं। दूसरे नंबर के राजेंद्र उर्फ राजू और तीसरे नंबर के कृपाल सिंह के बीच का रिश्ता बेहद खास था। माता-पिता का साया सिर से पहले ही उठ चुका था। दोनों की शादी नहीं हुई थी। गांव में एक ही घर में रहते थे। इनके अलावा गांव में ही इनके दो छोटे भाई पुनेश और वीनेश, अपने-अपने परिवारों के साथ अलग-अलग मकान में रहते हैं।