फिरोजाबाद। थाना जसराना क्षेत्र में 2004 में हुए चर्चित विजयपाल सिंह हत्याकांड मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अभियुक्त श्यामवीर सिंह और प्रेमवीर सिंह निवासी नसूपुर संजैती, थाना जसराना को साक्ष्य और गवाहों के मुकरने के कारण संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
वादी मुकदमा गजवीर सिंह निवासी नसूपुर संजैती ने 29 अगस्त 2004 को थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 28 अगस्त 2004 की बीती रात उनका 42 वर्षीय भाई विजयपाल सिंह अपने मकान के सामने नीम के पेड़ के नीचे चारपाई पर सो रहा था। बेटा शिवकुमार उर्फ बॉबी और भाई विजय कुमार तथा पड़ोस के अन्य लोग पास ही लेटे हुए थे। गांव के रामरतन, शिवरतन, श्यामवीर, प्रेमवीर, दीपू और भूरा अपने लाइसेंसी हथियारों व तमंचों से लैस होकर आए और गाली-गलौज करने लगे। रामरतन व शिवरतन ने विजयपाल सिंह पर जान से मारने की नियत से दो फायर किए, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने प्रेमवीर और श्यामवीर की नामजदगी रंजिशन पाते हुए उनके नाम आरोप पत्र से पृथक कर दिए थे और अन्य अभियुक्तों रामरतन, शिवरतन, दीपू व भूरा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसे 25 जुलाई 2007 को स्वीकार कर प्रेमवीर और श्यामवीर को तलब किया गया। हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा इस आदेश पर स्थगन आदेश दिया गया था जो 11 नवंबर 2022 को निरस्त हुआ और इसके बाद इन दोनों का विचारण अलग से प्रारंभ हुआ।
मुख्य अभियुक्तगण शिवरतन, दीपू, भूरा एवं रामरतन के मामले में पूर्व में ही 9 सितंबर 2016 को निर्णय हो गया। अब अभियुक्त प्रेमवीर और श्यामवीर पर केस चल रहा था, जिसमें सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह अपने बयानों से पलट गए। उन्होंने घटना के समय प्रेमवीर व श्यामवीर को मौके पर नहीं देखना बताया। इस पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष इन दोनों अभियुक्तों के खिलाफ सामान्य आशय या घटना में संलिप्तता को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। इसके चलते कोर्ट ने अभियुक्त श्यामवीर सिंह और प्रेमवीर सिंह को दोषमुक्त कर दिया।