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कुपोषण मिटाने को अब गर्भवती महिलाओं की होगी देखभाल

Mon, 11 Jan 2016 08:25 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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कुपोषित बच्चों की संख्या घटाने के लिए अब गर्भवती महिलाओं की देखभाल शुरू की जाएगी। अब जिले में गर्भवती महिलाओं के चिह्नांकन का अभियान भी काफी तेजी से चलेगा। 27 जनवरी से तीन फरवरी तक महिलाओं का चिह्नांकन कर उनकी देखभाल की जाएगी।
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प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने प्रदेश भर के डीएम के साथ मंडलायुक्तों को पत्र जारी कर कहा कि बच्चे कुपोषण का शिकार मां के गर्भ में ही हो जाते हैं। जन्म से पूर्व ही यदि गर्भवती मां की देखभाल सही ढंग से की जाए तो काफी हद तक कुपोषण को रोका जा सकता है। राज्य पोषण मिशन और आईसीडीएस विभाग के तहत सर्वे में 13 लाख अति कुपोषित बच्चों की पहचान हुई थी। प्रदेश में कराए गए सर्वे में जानकारी हुई है कि 50 प्रतिशत गर्भवती होने वाली महिलाओं में ब्लड की कमी रहती है। सीडीओ सुजीत कुमार ने बताया कि शासन के आदेश पर जिले में 27 जनवरी से तीन फरवरी तक चलने वाले अभियान के लिए ब्लाकवार नोडल अधिकारी तैनात किए जा रहे हैं। अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं के पंजीयन के साथ, संस्थागत प्रसव कराने पर जोर, ग्रामीण क्षेत्र में कई जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सात दिन तक चलने वाले अभियान में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवती महिला की जांच सुबह नौ बजे से शाम को चार बजे तक होगी। यदि कहीं महिलाएं छूट जाएं तो चार फरवरी को उपकेंद्र पर जांच होगी। हाईरिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की जांच होगी। हाईरिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं का चिह्नांकन कर उनका उपचार महिला अस्पताल की चिकित्सक टीम द्वारा किया जाएगा। गांव में ब्लाक स्तरीय पीएचसी एवं शहरी क्षेत्र में अस्पताल में उपचार मिलेगा।
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यह दर्शाती है यूनीसेफ की रिपोर्ट
- 28 प्रतिशत महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान हो पाती हैं चार जांच।
- मात्र 7.6 प्रतिशत महिलाओं को सौ या सौ से अधिक ही आयरन की गोलियां मिल पाती हैं।
- मात्र 4.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं के द्वारा ही सेवन की जाती हैं सौ आयरन की गोलियां।
- मात्र 2.7 प्रतिशत महिलाओं को ही प्रसव पूर्व उपलब्ध हो पाती हैं सभी सेवाएं।
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