अभियान- बदहाल स्वास्थ्य सेवा एक माह से बंद पड़ी थायराइड जांच मशीन
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उत्तर प्रदेश के फिरोजााबाद में अत्याधुनिक सुविधाओं का दावा करने वाले मेडिकल कॉलेज में थायराइड जांच भी नहीं हो पा रही है। करीब एक महीने से मशीन खराब होने से थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। इसके चलते हर रोज 80 मरीज बिना जांच करवाए ही लौट जा रहे हैं। या फिर प्राइवेट पैथोलॉजी पर जांच कराने को जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज का लगातार विस्तार किया जा रहा है। नए बिल्डिंग्स बनाकर अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं। यहां गंभीर मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलना तो दूर बल्कि अस्पताल की लैब में सभी जांच की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि थायराइड की जांच तक नहीं होती। मरीज आज भी प्राइवेट पैथोलॉजी का सहारा लेने को मजबूर हैं।
सौ शैय्या अस्पताल में थायराइड जांच की लैब बनाई गई है। तीन माह पहले मशीन लगातार दो महीने खराब रही। 10 दिन मशीन चलने के बाद फिर एक महीने से मशीन बंद पड़ी है। मशीन खराब होने के कारण मरीजों की जांच नहीं हो पा रही थी।
सीएमएस डा. नवीन जैन ने बताया कि मशीन बंद होने की वजह से थायराइड जांच फिलहाल नहीं हो रही है। मशीन को जल्द ही चालू कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हम कंपनी को पत्राचार कर रहे हैं। जल्द ही थायराइड मशीन चालू हो जाएगी।
दो जगह निकलवाना पड़ता है जांच के लिए खून
अस्पताल में प्रतिदिन थायराइड की जांच करवाने के लिए 70 से 80 के बीच मरीज आते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ भी गर्भवती महिलाओं की थाइराइड सहित अन्य जांचे लिख देती हैं। मरीज अन्य जांचों के लिए मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में जाते हैं। जहां एक सैंपल निकलवाने के बाद थायराइड जांच के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी पर भेज दिया जाता है।
वहां भी मरीजों को अलग से दर्द झेलना पड़ता है। प्राइवेट पैथोलॉजी पर एक मरीज को जांच के लिए 300 से 500 रुपये देने पड़ रहे हैं। अगर किसी मरीज की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो वो उसको बिना जांच करवाए ही लौटना पड़ रहा है।
यह है थायराइड
थायराइड की समस्या थॉयरॉक्सिन हार्मोन के असंतुलन के कारण होती है। इस हार्मोन के कारण पूरे शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऊर्जा में कमी, चिड़चिड़ापन, वजन असंतुलन, रक्तचाप आदि इसके लक्षण हैं।