सुहाग नगरी को भले ही नगर निगम का दर्जा मिल गया है, लेकिन वार्ड नंबर एक सैलई की जनता वर्षों बाद भी ग्रामीण परिवेश में रहने को विवश है। यहां नगर निगम की सुविधा जैसी बात नजर नहीं आती।
नगर पालिका बोर्ड (वर्तमान में नगर निगम) में वर्ष 2008 में शहर से सटी 13 ग्रामसभाएं पालिका सीमा में शामिल हुईं। पालिका सीमा में शामिल होने के छह साल बाद भी सैलई क्षेत्र के हालात में कोई बदलवा नहीं हुआ। शासन ने चार अगस्त 2014 में नगर पालिका को उच्चीकृत करते हुए नगर निगम का दर्जा दे दिया। नगर निगम बनने के बाद शासन से करोड़ों की धनराशि हुई। नगर निगम द्वारा करोड़ों की धनराशि खर्च कर शहर के चहुंमुखी विकास के दावे किए गए, लेकिन वार्ड नंबर एक के हालात फिर भी नहीं बदले। वर्षों बाद भी वार्ड के लोग ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। वार्ड में जगह-जगह कच्ची गलियां। यहां नाली हैं न खड़ंजा। कच्ची सड़कों पर जगह-जगह बंधे पशु। खेत खलिहानों जैसा माहौल है। मुख्य मार्ग भी पूरी तरह ऊबड़-खाबड़ है। पूरे वार्ड में सफाई व्यवस्था के नाम पर स्थिति पूरी तरह शून्य है।
वार्ड में यह हैं प्रमुख समस्यांए
- वर्षों बाद भी कच्ची पड़ी हैं अधिकांश लिंक गलियां
-विद्युत पोल न होने के कारण दो-तीन किमी. दूर से केबल खींचकर लाने को मजबूर हैं लोग
-पेयजल का नहीं पर्याप्त इंतजाम, वर्षों पुराने लगे नलकूप आए दिन होते हैं खराब
-पूरे वार्ड में सफाई व्यवस्था ध्वस्त। हजारों की आबादी पर तैनात हैं मात्र 10 कर्मचारी
वार्ड में यह है खास- वार्ड में मजदूरी और खेतीबाड़ी करने वाले हैं लोग
आबादी - करीब 30 हजार
वोटर- 14 हजार
वार्ड के मोहल्ले- महादेव नगर, ठारपूठा, गायत्री नगर, प्रेम नगर, सैलई, उत्तम नगर, जगजीवन नगर, प्रताप नगर, रविदास नगर, नगला पीपरिया, नई आबादी।
क्या कहते हैं वार्ड के बाशिंदे
किशनपाल- नगर निगम की लापरवाही से पूरे वार्ड में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। महादेव नगर नाला अधिकांश समय चौक रहता है। बरसात में हालात गंभीर हो जाते हैं।
जितेंद्र तिवारी का कहना है कि ठारपूठा में मुख्य मार्ग पूरी तरह ऊबड़-खाबड़ पड़ा है। सड़क क्षतिग्रस्त होने से आए दिन हादसे होते हैं। नगर निगम में कई बार शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं होती।
अलवर सिंह यादव का कहना है कि सैलई में पानी की गंभीर समस्या है। नगर निगम द्वारा नलकूप लगाए गए हैं, उनकी टंकियों में सप्लाई खोल दी जाती है। क्षेत्र की जनता पानी के संकट से जूझ रही है।
सियाराम यादव का कहना है कि नगर निगम द्वारा छह माह पूर्व नाली तो बनवा दी गई हैं, परंतु सड़क व खड़ंजा अभी तक नहीं बनवाया हैं। कच्ची गलियां होने के कारण आवागमन में काफी परेशानी होती है।
इनकी भी सुनिए
अपने कार्यकाल में वार्ड की 50 प्रतिशत सड़कों का निर्माण कराया गया है। पेयजल की गंभीर समस्या के लिए वार्ड में पांच नलकूप स्थापित कराए गए हैं। वार्ड में सफाई कर्मचारियों की काफी कमी रही। कई बार शिकायत की गई, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।
संजय देवी- निवर्तमान सभासद