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फिर बारिश-ओलावृष्टि, दाना बचेगा न चारा

Tue, 14 Apr 2015 11:15 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फीरोजाबाद
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किसानों को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही, मंगलवार को जसराना क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई, ओले पडे़, पकी खड़ी गेहूं की फसल में पानी भरा, वहीं कटी फसलें पानी में उतरा गईं। गेहूं सड़ना शुरू हो गया, अब चारे का संकट होगा। जिले में दो किसानों की और मौत हो गई। किसानों को राहत प्रदान करने को प्रशासन ने बैठक कर मंथन किया। सख्त हिदायत दी कि सर्वे हवाई नहीं जमीनी होना चाहिए। यदि किसान की शिकायत आई तो सीधे निलंबन होगा। 
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 मंगलवार को जसराना, फरिहा व खैरगढ़ क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया। गेहूं तो सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। गीला होे से लॉक खराब होगा। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 80 से 85 प्रतिशत गेहूं की फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है। झमाझम बारिश के कारण गेहूं की कटाई, गहाई का काम थम गया है। गेहूं इतना गीला हुआ कि दस दिन तेज धूप निकलने पर वह काटने लायक होगा। जसराना क्षेत्र में तेज हवा के साथ झमाझम बारिश हुई। पौन घंटे की तेज बारिश और ओलों ने लोगों को जहां के तहां रोक दिया। जिले में कई जगहों पर भी हल्की फुल्की बारिश हुई। किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए रहा। खेतों में पानी भरने से गेहूं, जौ की फसलों तो उतराने लगीं।


जसराना के इन गांवों में ओलावृष्टि..
जसराना के पाढ़म, झपारा, नगला रंजीत, कोडरी, बिठवारा, सायपुर, अकबरपुर कुतकपुर, नगला पीपल, जसराना, अतुर्रा, आबू, नगला शादी, पटीकरा, कबिलपुर, उस्मानपुर, मौहम्मदाबाद, साहाबाद, मौहम्दपुर, दयापुर, बहलालपुर, सिकंदरपुर, नगला मिलिक सहित कई गांवों में ओले गिरे हैं।
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किसान बोले अब कहीं का नहीं छोड़ा.....
- पट्टी निवासी किसान श्रीनिवास ने कहा बारिश ने कहीं का नहीं छोड़ा। पहले आलू की फसल बर्बाद की अब तो इंद्रदेव ने गेहूं को नहीं छोड़ा। रोटी के साथ चारे का संकट खड़ा होगा।
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- आबू अतुर्रा के गौरीशंकर ने कहा तेज बारिश व हवा के झोंकों के साथ गिरे ओलों ने फसल को तहस नहस कर दिया है। अब तो जीरा जैसे दाने की उम्मीद भी छूट गई।
- नगला पीपल के वयोवृद्ध किसान चरनसिंह ने कहा कि ओलावृष्टि, आंधी एवं बरसात से गेहूं की फसल तबाह कर दी। लहसुन की फसल को भी नुकसान हुआ है।


प्रशासन के दूसरे सर्वे की स्थिति
- जिले में कुल 186634 हेक्टेयर में बोई गई फसलें।
- 63027 हेक्टेयर फसलें बारिश, ओलावृष्टि से प्रभावित।  
- 30294.056 हेक्टेयर में 33 प्रतिशत से अधिक हानि।
- 27035.795 हेक्टेयर गेहूं की फसल है शामिल।
- 3225.261 हेक्टेयर अन्य फसलों में हुई है हानि।
- 26 हेक्टेयर ही आलू की फसल हुई है बर्बाद।
- 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से केंद्र से डिमांड
- 40 करोड़ 89 लाख 69756 रुपये का मुआवजा चाहिए।
- दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले किसानों की सूची मांगी।
- कम से कम दो हेक्टेयर बर्बादी का इन्हें भी मुआवजा मिलेगा।
- अभी तक दो करोड़ 69 लाख 82 हजार मुआवजा राशि जिला प्रशासन ने बांटी।
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