चूड़ी उत्पादन के लिए मिली गैस सुहागनगरी में पकाई भट्ठियों में फुंक रही है। उद्योग विभाग एवं गैल अफसरों की मिलीभगत के चलते आधा दर्जन से अधिक कारखानों में पकाई भट्ठियां संचालित हो रही हैं। कांच इकाइयों में पकाई भट्ठियां चलने की खबर जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
कांचनगरी में वर्ष 1996 में करीब 400 इकाइयों का संचालन होता था लेकिन टीटीजेड में आने के बाद सरकार ने कोयला से संचालित इकाइयों को गैस से चलाने के निर्देश दिए। गेल एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शर्तों के आगे 50 प्रतिशत उद्यमी मैदान छोड़ गए। वर्तमान में करीब 191 चूड़ी एवं ग्लास की इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में आधा दर्जन से अधिक इकाइयों में चोरी छिपे चूड़ी उत्पादन छोड़ पकाई भट्ठियां संचालित की जा रही हैं। सरकार द्वारा उद्यमियों को कांच व चूड़ी उत्पादन के लिए गैस उपलब्ध कराई जाती है, परंतु उद्यमियों द्वारा उद्योग विभाग एवं गेल अफसरों की मिलीभगत से कारखानों में ही पकाई भट्ठियां संचालित की जा रही हैं। जबकि गेल गैस लि. के नियमानुसार कांच इकाइयों में पकाई भट्ठियां नहीं चलाई जा सकतीं। जिला प्रशासन ने कोयला संचालित सभी 111 पकाई भट्ठियां बंद करा दी हैं, तो कारखानों में भट्ठियां चलाने वाले उद्यमियों की कलई भी खुलना शुरू हो गई है।
किराए पर चल रही हैं गैस की पकाई भट्ठियां
कांच चूड़ी का उत्पादन बंद कर उद्यमियों ने कारखानों में किराए पर पकाई भट्ठियां चलाना शुरू कर दिया है। इसमें एक पकाई भट्ठी के प्रतिदिन 6000 तथा एक लेयर के प्रतिदिन 7000 रुपये वसूले जाते हैं। डेढ़ से दो लाख रुपये तक एडवांस भी वसूला जाता है।