सुहाग नगरी में फिर से विकास कार्य रफ्तार पकड़ेंगे। राज्य वित्त आयोग के तहत शासन से मिलने वाली ग्रांट में बढ़ोत्तरी की गई है। डीएम के निर्देश पर निर्माण विभाग नए प्रस्ताव तैयार करने में जुट गया है। शहर में कई स्थानों पर जल्द ही विकास प्रारंभ होंगे।
नगर निगम प्रशासन पिछले करीब छह माह से धनाभाव की समस्या से जूझ रहा था। इसका प्रमुख कारण था कि शासन द्वारा नगर निगम को राज्य वित्त आयोग के तहत दी जाने वाली ग्रांट में प्रतिमाह के हिसाब से करीब 18-20 करोड़ की कटौती कर दी गई थी। इससे नगर निगम प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई थीं। राज्य वित्त आयोग के तहत चल रहे कार्य अधर में लटक गए। ठेकेदारों का भुगतान न होने से उन्होंने भी कार्य पूर्ण करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इधर नगर निगम प्रशासन द्वारा ग्रांट बहाल कराने को कई बार लखनऊ में डेरा जमाया। लंबी कवायद के बाद नगर निगम अफसरों को सफलता भी मिली।
नगर निगम की पहल पर शासन द्वारा राज्य वित्त आयोग के तहत काटी गई ग्रांट को बहाल करने के आदेश कर दिए हैं। नगर निगम सूत्रों की मानें तो अभी तक राज्य वित्त के तहत करीब 4.90 करोड़ की ग्रांट मिल रही थी, वह बढ़ोत्तरी के बाद करीब 6.50 करोड़ हो गई है। ग्रांट बहाल होने से नगर निगम प्रशासन की काफी हद तक समस्या दूर हो गई है। शासन से ग्रांट बहाली होते ही जिला प्रशासन विकास कार्यों को पुन: ढर्रे पर लाने को योजना बनाने लगा है। डीएम के निर्देश पर निर्माण विभाग द्वारा शहर से विकास को नए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। अवकाश के दिनों में भी विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने को अधिकारी- कर्मचारी मशक्कत करते देखे जा रहे हैं। राज्य वित्त आयोग के तहत करीब 10 करोड़ के प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं। डीएम से हरी झंडी मिलने के बाद उक्त विकास कार्य धरातल पर नजर आएंगे।