लगातार हो रहे हादसों के बाद भी सुधार नहीं कर रहा विद्युत विभाग
एटा की घटना सुहाग नगरी के लिए भी बड़ा सबक है। विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते सुहागनगरी में करंट लगने से मौतें होती रही हैं। सड़क पर नीचे लटकते तारों की चपेट में आने से वाहन सवार अचेत होते रहे हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारियों ने लटकते तारों को ठीक कराने की कोई पहल नहीं की और न ही हादसाें को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास।
जर्जर लाइनों के करंट से हुई थी 13 लोगों की मौत
11 मार्च 2016 को बाईपास मार्ग स्थित बंबा चौराहा के समीप असंतुलित ट्रक की टक्कर से हाईटेंशन लाइन का पोल क्षतिग्रस्त हुआ, वहीं तार टूटकर बरात पर गिर पड़े थे। दर्दनाक हादसे में करीब 13 लोगों की मौत मौके पर ही हो गई थी। मरने वालों में सभी बैंड कर्मी शामिल थे।
किसान की मौत के बाद लगाया था जाम
जसराना थाना क्षेत्र में सिंकदपुर निवासी किसान की गांव इमलिया के समीप हाईटेंशन लाइन के तारों की चपेट में आने से करंट लगने से मौत हो गई थी। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने पाढ़म के समीप जाम लगा दिया था। करीब तीन घंटे तक सड़क मार्ग जाम कर विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी की गई।
ट्रक में दौड़ा था करंट
नसीरपुर थाना क्षेत्र स्थित बटेश्वर मार्ग पर 13 अगस्त को ट्रक हाईटेंशन लाइन के तारों से टकरा गया था। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत और 25 से अधिक श्रद्धालु झुलस गए थे। सभी श्रद्धालु बटेश्वर मंदिर पर घंटा चढ़ाने जा रहे थे।
मासूम के साथ किशोर की भी हुई थी मौत
12 अगस्त को थाना सिरसागंज के गांव नगला भूपाल में खेत में टूटे पड़े हाईटेंशन लाइन के तार की चपेट में आने से 13 वर्षीय किशोर करन सिंह की मौत हो गई थी। वहीं थाना जसराना के गांव कटोरी निवासी गुड्डू के तीन वर्ष पुत्र शिवशंकर की घर के बाहर खेलते समय विद्युत पोल में करंट आने से मौत हो गई थी।
देवर भाभी की मौत के बाद सहम गए थे लोग
वर्ष 2014 में उत्तर थाना क्षेत्र के रानी वाला कंपाउड निवासी देवर भाभी की करंट लगने से मौत हो गई थी। हादसा महिला द्वारा कूलर में पानी भरने के दौरान हुआ। भाभी को बचाने पहुंचे देवर को भी करंट लगा और दोनों की मौत हो गई।
कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूरी
दर्जनों मामले ऐसे है जहां हादसों के बाद संबंधित जेई और विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ पुलिस पीड़ित परिवारीजनों की तहरीर पर मुकदमा तो दर्ज कर लेती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर मुकदमे में एफआर लगाकर फाइल बंद कर दी जाती है। इसके चलते पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता और न ही हादसे थमने का नाम लेते।