संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। अक्सर प्रेम प्रसंग या शादी का झांसा देकर नाबालिगों को साथ ले जाने वाले मामलों में सहमति को ढाल बनाया जाता है, लेकिन कानूनन यह बिल्कुल मान्य नहीं है। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) मुमताज अली की कोर्ट ने एक जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता नाबालिग है, तो शादी और शारीरिक संबंध में उसकी सहमति का कानून की नजर में कोई मूल्य नहीं है।
किशोरी की मां ने थाना शिकोहाबाद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग पुत्री 6 नवंबर 2025 की शाम को घर से बिना बताए कहीं चली गई थी। पुलिस ने अभियुक्त अनुज कुमार निवासी ग्राम मोहब्बतपुर अहीर, थाना शिकोहाबाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उसके खिलाफ दुष्कर्म की धारा बढ़ाई गई थी। अभियुक्त अनुज कुमार ने अपने अधिवक्ता के जरिये जमानत अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट में दलील दी कि किशोरी उसकी मर्जी से साथ गई थी और दोनों ने मंदिर में शादी कर ली थी। पीड़िता ने भी बयानों में स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से गई और आगरा के एक मंदिर में शादी की और उनके बीच शारीरिक संबंध बने। हालांकि, विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) मुमताज अली ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि मेडिकल और दस्तावेज के आधार पर पीड़िता की उम्र मात्र 17 वर्ष थी। कानून के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु की लड़की अपनी सहमति देने के लिए कानूनी रूप से सक्षम नहीं मानी जाती है।