मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं को प्रशासन मूर्त रूप देने में जुटा है लेकिन इसमें बाधाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। पहले किसानों से अधिग्रहण कराने के लिए अधिकारियों को चक्कर काटने पड़े तो अब फिर भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। 120 किमी रफ्तार के रोमांच वाले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस में सड़कों के मोड़ बाधक बन गए हैं और उनको सीधा करने के लिए प्रशासन अब अधिक भूमि का चिह्नांकन कर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई दोबारा से शुरू की है।
सपा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे के निर्माण की मैपिंग का कार्य सीधे सैटेलाइट के माध्यम से किया गया था। यही कारण रहा कि सेटेलाइट मैप के बाद धरातल पर काम शुरू होने पर काफी बदलाव आ गया। करीब 32 किलोमीटर लंबाई में गुजरने वाले हाईवे में 31 गांवों के किसानों से भूमि अधिग्रहीत की गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी ही कर ली गई थी। एक्सप्रेस वे का निर्माण कराने वाले संस्था ने मिट्टी डालने का काम तेज कर दिया लेकिन टेक्निकल विंग ने 120 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी के दौड़ाने के लिए मोड़ वाले स्थानों का चिह्नांकन किया तो करीब एक दर्जन स्थानों पर भूमि की और अधिक जरूरत महसूस की गई। मोड़ों और दो गांवों को जोड़ने वाले स्थलों पर अधिक भूमि की जरूरत होगी, जिससे 120 किमी की रफ्तार से वाहन दौड़ सकें। ऐसे स्थानों पर और भूमि अधिग्रहण की जरूरत है। तहसील की टीम ने ऐसे स्थान चिह्नांकन करने के साथ किसानों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। गढ़ी डुंडपुर, फतेहपुर कर्खा, गोसपुर में करीब डेढ़ हेक्टेयर भूमि की और जरूरत महसूस हुई है।
आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे के निर्माण में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन किसानों ने बैनामा नहीं कराया, उनका पैसा कोर्ट में जमा करा दिया गया है।। दो गांवों के ज्वाइंट एवं मोड़ वाले करीब एक दर्जन स्थानों पर ही भूमि की जरूरत होगी। इसकी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी।
कर्मेंद्र सिंह एडीएम, फीरोजाबाद