तूफानों में संघर्ष के दम पर दीप जलाना था...
टूंडली में हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
टूंडला। टूंडली में हुई एक शाम बाबा साहब के नाम कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कवि सतीश एकांत ने ‘तूफानों में संघर्ष के दम पर दीप जलाना था, विष पीकर उनको दूसरों का जीवन महकाना था।’
कवि सम्मेलन का उद्घाटन समाजसेवी डॉ. ब्रजेशकुमार ने फीता काटकर किया। विशिष्ठ अतिथि के रूप में ब्लाक प्रमुख चौधरी भंवर सिंह और वीर सुरेंद्र यादव उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन की शुरूआत कवियित्री सुनीता बौद्ध की बुद्ध वंदना के साथ हुई। राष्ट्रीय कवि प्रो. ओेमपाल सिंह निडर ने पढ़ा- उठो साथियों ने निज धर्म बिक न जाए, बहनों जगो निज शर्म बिक न जाए। रजनीश उपाध्याय ने ‘जो अपनी दुआओं से हर मुसीबत को टाल देते हैं उन्हीं बुजर्गों को हम घर से निकाल देते हैं।’
प्रतीक तिवारी ने ‘अखंड भूखंड में प्रताप भी प्रचंड है नेत्र से न जिसके पतंग नेत्र मिल पाता है, ब्योम में अनंत तारे उनके बीच एक चंद्र बनके अपना हिंद जगमगाता है।’ अलीगढ़ के कवि वेदप्रकाश मणि ने ‘बाबा हमारे भीम आप फिर से आइए भारत के दीन दुखियों की पीड़ा मिटाइए, खुशहाल रहे देशवासी आकर के फिर तिरंगे का गौरव बढ़ाइए।’
संचालन कर रहे कवि रामराहुल ने पढ़ा-राष्ट्र सारा होगा धंय, देख के दोबारा तुम्हें एक बार फिर से आंबेडकर आइए। इसके अलावा सुनीता बौद्ध व जीपी गौतम, डॉ. महेंद्र सिंह ने भी काव्य पाठ किया। एमपी सिंह, सभासद अवधेश राना, प्रकाश चंद्र मौर्या, पवन कपूर, रघुनाथ सिंह राठी, सुबोध कुमार, अनुज कुमार, विजेंद्र सिंह, नरेंद्र कुमार नेमी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बसपा के जिला सचिव सूर्यकांत ने की।
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