पालिका बोर्ड के दो साल के कार्यकाल में सफाई कर्मचारियों को ठेका उठाने में हुए 4.5 करोड़ के घोटाले से संबंधित सभी साक्ष्य हाईकोर्ट ने तलब किए हैं। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई होनी है। इसके लिए उपायुक्त प्रमोद कुमार सभी साक्ष्य लेकर हाईकोर्ट के लिए रवाना हो गए हैं।
नगर पालिका (वर्तमान में नगर निगम) में वर्ष 2012 से 14 तक तैनात रहे अधिशासी अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी व एकाउंटेंट ने 89 दिनों के फॉर्मूले के बहाने दो सालों तक सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया। मार्च 2013 से जुलाई 14 तक इसी फार्मूले को अपनाकर बिना किसी टेंडर के ठेके उठाए गए। दो साल तक करोड़ों का गोलमाल होता रहा। डीएम द्वारा कराई जांच में करोड़ों के गबन में पूर्व चेयरमैन राकेश दिवाकर सहित आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। वहीं एक दर्जन ठेकेदारों पर भी एफआईआर दर्ज हुईं। गिरफ्तारी से बचने को अधिकांश हाईकोर्ट की शरण में चले गए। मामला हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद घोटाले से जुड़े साक्ष्य हाईकोर्ट ने तलब कर लिए हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर उपायुक्त प्रमोद कुमार सभी साक्ष्यों के साथ रवाना हो गए हैं। शुक्रवार को मामले में सुनवाई होनी है।
यह है पूरा मामला
पालिका बोर्ड के दो साल के कार्यकाल में हुए 4.50 करोड़ के घोटाले की जांच डीएम विजय किरन आनंद ने सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र, वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज को सौंपी, जिसमें गलत ढंग से चार करोड़, 55 हजार 43 हजार 467 रुपये भुगतान किए जाने का मामला पकड़ा था। डीएम के निर्देश पर उपायुक्त प्रमोद कुमार द्वारा पूर्व चेयरमैन राकेश दिवाकर, पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एके चौधरी, वर्तमान नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. महाराज सिंह, ईओ सुभाष पांडेय, जगदीश यादव, अनिल कुमार तथा लेखाकार हसन रजा सहित 10 ठेकेदारों के खिलाफ थाना उत्तर में 409, 420 के तहत अभियान दर्ज कराया था।
इन ठेकेदारों के खिलाफ भी हुई रिपोर्ट
नगर निगम के उपायुक्त द्वारा बंटू, इरफान, मुरारीलाल, पन्नालाल, शगुफ्ता, लोकेंद्र पाल सिंह, रविकुमार लवानियां, इमरान, सचिन, अश्वनी, जगदीश व कल्पना कुमारी के नाम एफआईआर दर्ज कराई गई है।
न्यायालय पहुंचे नगर स्वास्थ्य अधिकारी और लेखाकार
नगर पालिका द्वारा ठेका सफाई कर्मचारियों के लिए उठाए गए टैंडर प्रक्रिया में लाखों रुपये के घपले के मामले में वांछित चल रहे नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. महाराज सिंह और लेखाकार हसनराज पुलिस कार्रवाई से बचते हुए न्यायालय पहुंचे लेकिन अधिवक्ताआें द्वारा कार्य न किए जाने पर वह वापस चले गए।