सरकारी ट्रामा सेंटर में सीढ़ियों पर लेट कर इलाज कराता युवक
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फिरोजाबाद। कोरोना काल में जिला प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं फेल साबित हुई हैं। रविवार को जिला अस्पताल के हालात यह रहे कि इमरजेंसी और वार्ड पूरी तरह फुल हो चुके थे। चारों ओर मरीजों की चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी।
कोई जल्द इलाज देने की बात कर रहा था तो कोई ऑक्सीजन लगाने को कह रहा था। हालांकि मरीजों की व्यथा सुनने वाला अस्पताल में कोई नहीं था। तीमारदार हर आने वालों को आस भरी निगाह से देख रहे थे। हालांकि धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों का दिल मौत का मंजर को देखकर भी नहीं पसीज रहा था।
केस एक
साहब...! रिपोर्ट आने में इलाज कर दो...
स्टेशन रोड निवासी बैंककर्मी की मां का ऑक्सीजन लेवल कम हो गया। कोरोना की जांच के लिए दो दिन पहले सैंपल दिया लेकिन रिपोर्ट नहीं आई। नॉन कोविड अस्पताल में भर्ती करने के लिए बैंककर्मी अपनी मां को लेकर आया लेकिन पलंग न होने स्टाफ ने इनकार कर दिया। बैंककर्मी गिड़गिड़ाता रहा कि रिपोर्ट आने के बाद तो मां कोविड अस्पताल में भर्ती हो जाएगी।
केस दो
शिकोहाबाद निवासी युवक को सांस लेने में दिक्कत थी। सीटी स्कैन की रिपोर्ट में हाई रिस्क बताया गया। सीटी स्कैन में कोविड-19 भी लिखा था। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने युवक को कोविड अस्पताल में भर्ती करने से इकार कर दिया और कहा कि बिना आरटीपीसीआर अथावा एंटीजन जांच के मरीज भर्ती नहीं किया जाएगा। परिजनों ने कोविड जांच करने की बात कही तो स्वास्थ्य अधिकारियों ने सुबह जांच होने की बात कही। उपचार नहीं मिलने पर युवक ने दम तोड़ दिया।
केस तीन
आगरा निवासी मुकेश की गुर्दे की समस्या एकाएक रविवार को बढ़ गई। मुकेश के रिश्तेदारों ने आगरा में बेड और ऑक्सीजन की समस्या के चलते फिरोजाबाद में बुला लिया। फिरोजाबाद के जिला अस्पताल में पहले तो मुकेश को गेट में दो घंटे बाद प्रवेश दिया गया। एंबुलेंस में मरीज दर्द से कहारता रहा, लेकिन मुकेश का दर्द सुनने वाला कोई नहीं था। मुकेश की पत्नी ने ऑक्सीजन लगाने को कहा लेकिन ऑक्सीजन के लिए चिकित्सकों की मंजूरी नहीं मिली। इस बीच मुकेश ने दम तोड़ दिया।