कलियुग में मात्र प्रभु का नाम श्रवण करने से ही मनुष्य की मुक्ति संभव है। जो पुण्य पूर्व में ऋषि-मुनियों को सहत्रों वर्ष की तपस्या के बाद प्राप्त होते थे, वह पुण्य इस युग में थोड़ा सा प्रभु स्मरण व दान-पुण्य करके प्राप्त किया जा सकता है। यह प्रवचन ठाकुर बीरीसिंह कालेज में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन आचार्य कौशिक महाराज ने कहे।
आचार्य ने कहा कि श्रीराम कथा के माध्यम से मनुष्य काफी पुण्य कमा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कथा में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है और अगर मनुष्य चाहे तो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में से इतना तो समय निकाल ही सकता है। प्रवचन करते हुए आचार्य ने कहा कि कलयुग ही एक ऐसा समय है, जहां कुछ समय के लिए प्रभु का नाम सुनने मात्र से मानव को इस लोक से मुक्ति मिल जाती है। और उसे भगवान केश्री चरणों में स्थान प्राप्त होता है।