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पानी में अत्याधिक मिट्टी व बालू आने के कारण मरी थीं मछलियां

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फिरोजाबाद। विगत दिनों यमुना नदी के पानी में बालू और मिट्टी की अधिकता के कारण ही मछलियों के मरने की घटना सामने आई थी। जांच के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) द्वारा शासन की भेजी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
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विगत 22 और 24 जुलाई के मध्य अंते की मढैया, नया बांस एवं सोफीपुर में यमुना नदी के किनारे सैकड़ों की संख्या में मृत मछलियां मिलीं थीं। इससे पूर्व पड़ोसी जिला इटावा और मैनपुरी में भी यमुना नदी में मछली मरने की सूचना सामने आईं। मछली मरने की घटना प्रकाश में आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना नदी के जल की जांच और निगरानी कराई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निदेशालय लखनऊ को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक विगत 20 जुलाई को काफी समय बाद मथुरा बैराज से छोडे़ गए पानी में बालू और मिट्टी की मात्रा अधिक थी। इस कारण से पानी में घुलनशील आक्सीजन यानि डीयू की प्रतिशत सामान्य से कम यानि करीब 5.5 प्रतिशत एवं पीएच के अलावा पानी में घुलनशील मिट्टी और बालू की मात्रा करीब 6.5 प्रतिशत थी। बारिश के दिनों में छोड़े गए पानी में डीयू (डायलूट ऑक्सीजन) और पीएच (पोटेंशियल ऑफ हाईड्रोजन) की असामान्य मात्रा व बदलाव को सहन नहीं कर पाने के कारण मछलियों की मृत्यु हो गई। अब यमुना में पानी का बहाव तेज होने के कारण हालत सामान्य स्थिति में हैं।
जांच व निगरानी रखेंगे जारी
इटावा, फिरोजाबाद और मैनपुरी सीमा में प्रवाहित यमुना में मछली मरने जैसी घटना के बाद भी पानी की जांच व निगरानी का काम जारी रखा जाएगा। विगत दिनों यमुना में मछली मरने के पीछे पानी में अत्यधिक मिट्टी व बालू का समावेश होना संभावित है। रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
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डॉ मनोज कुमार चौरसिया, क्षेत्रीय अधिकारी पीसीबी
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