फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिरसा नदी में आया उफान तो जलमग्न होंगे कई गांव 

Sun, 29 May 2016 11:10 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
विज्ञापन
सिरसा नदी
विज्ञापन
 अतिक्रमण के चलते संकरे नाले में तब्दील हुई सिरसा नदी धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही है। नदी के किनारों को घेरकर ग्रामीणों ने खेती करना शुरू कर दी। बारिश कम और पानी नहीं छोड़े जाने की वजह से नदी वर्ष भर सूखी ही रहती है। इसकी वजह से नारखी, हाथवंत ब्लाक में जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया। नारखी ब्लाक तो डार्क घोषित हो चुका है। मानसून यदि अच्छा आया तो फिर नाले में तब्दील हुई नद ग्रामीणों की मुसीबत जरूर बढ़ाएगी। 
विज्ञापन

नारखी ब्लाक क्षेत्र के बेलनगंज एवं नगला पार से जिले में प्रवेश करने वाली सिरसा नदी बदतर हाल में पहुंच गई है। अतिक्रमण के चलते पानी गांव,गौंछ के साथ कई स्थानों पर नदी छोटे नाले के रूप में बदल गई। क्योंकि लंबे अर्से से नदी में पानी ही नहीं आया। नदी के किनारे कहीं पतेल तो कहीं बारिश के दिनों का पानी जमा रहने के कारण जलकुंभी अटी पड़ी है। नदी में पानी नहीं रहने के कारण ही नारखी ब्लाक के गांवों में जलस्तर काफी नीचे चला गया। समूचा ब्लाक डार्क एरिया घोषित है। हाथवंत ब्लाक के कई गांवों का हाल भी ऐसा है। गांव सांती के समीप नदी जलकुंभी से अटी पड़ी है। नदी की सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग लाखों रुपये खर्च करता रहा लेकिन नदी अपने पुराने स्वरूप में नहीं आ सकी। मानसून ठीक आया तो नदी किनारे बसे करीब दो दर्जन गांव के लोगों की मुसीबत बढ़ेंगी। गांव और फसलें जलमग्न होंगी। 

इटावा में सेंगर नदी में मिलती है सिरसा 
हरियाणा गोरुखपुर खजुरी गांव से निकलने वाली सिरसानदी जींद, गोहाना, गाजियाबाद, दादरी, खुर्जा, अलीगढ़, हाथरस एवं जलेसर होते हुए फीरोजाबाद में प्रवेश करती है। नारखी ब्लाक के गांव बेलनगंज, नगला पार, कातिकी, रैमजा, सिंहपुर, कनवार, राजारामपुर, नारखी धौंकल, गढ़ी हंसराम, नगला राधे, गढ़ी ऐबरन, असन, नगला डूमर, जाखई, नगला कूंम, पानी गांव, जाटऊ, नगरिया ब्रज, नगरिया पंचम, गौंछ, श्यावरी, सांती व बबाइन, मक्खनपुर के करीब से होते हुए शिकोहाबाद एवं मदनपुर से होकर इटावा जिले की ओर जाती है। इटावा के चकवा गांव के समीप सेंगर नदी में मिल जाती है। 
विज्ञापन


नारखी ताल्लुका के 92 वर्षीय नवाब सिंह राही कहते हैं कि 1957 में सिरसा नदी में बाढ़ आई थी। प्रशासन के अधिकारियों ने नाव के माध्यम से गांवों में गुड़ चना बंटवाया था। उन्होंने गुनगुनाया कि, 1957 में ऐसी बाढ़ आई रे, लोगन में बांटे गुड चना मिठाई रे..। 

गढ़ी अफोह निवासी 70 वर्षीय ठाकुर इंद्रपाल सिंह ने कहा सिरसा नदी के अस्तित्व को मिटाने का काम ग्रामीणों ने किया। नदी नाले में तब्दील हो गई। नदी में पानी रहता तो फिर आज हम पानी के संकट से नहीं जूझते। 1957 में बाढ़ के कारण गौंछ के समीप समूचा रोड कट गया था। इसके कारण शहर जाने को नाव चलानी पड़ी थी। 

नदियों की सफाई नहीं करा सकते। नाले की सफाई कराने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। सिरसा नदी की सफाई पहले कराई गई थी। जलस्तर बढ़ाने को लघु सिंचाई विभाग ने कई स्थानों पर चेकडैम बनाए, ताकि पानी रुके और जलस्तर बढ़े। हम प्रयास करेंगे कि नदी को मूल स्वरूप में वापस लाया जाए। 
विज्ञापन

अब्दुल लतीफ, एक्सईएन सिंचाई विभाग फीरोजाबाद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें