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अकेलेपन और भागदौड़ जिदंगी में लगे ब्रेक से हो रहा मानसिक तनाव

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फिरोजाबाद। कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे भारत में 36 दिनों का लॉकडाउन पूरा हो चुका है। लोग घरों में बंद हैं और सब कुछ जैसे रुका हुआ है। जनपद में कोरोना संक्रमण की संदिग्धता में 144 लोग मेडिकल क्वारंटीन हैं। वहीं, सात हजार से अधिक लोग होम क्वारंटीन हैं। यानि भागती-दौड़ती जिंदगी में अचानक लगे इस ब्रेक और कोरोना वायरस के डर ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। इस बीच चिंता, डर, अकेलेपन और अनिश्चितता का माहौल बन गया है और लोग दिन-रात इससे जूझ रहे हैं।
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जनपद में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं तो सख्ती भी की जा रही है। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों को भी क्वारंटीन किया जा रहा है। वर्तमान में 89 लोग आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं। वहीं 144 क्वारंटीन लोगों में 58 लोगों की रिपोर्ट आना शेष है। ऐसे में इन लोगों को भी कोरोना संक्रमण का डर मानसिक तनाव दे रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कतें उन लोगों को हैं, जो क्वारंटीन है। क्योंकि इन्हें स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग कमरों में क्वारंटीन कर देता है। यही कारण है कि एफएच मेडिकल कॉलेज में क्वारंटीन रेलवे कर्मचारी ने तनाव में आकर आत्महत्या कर ली। हालांकि क्वारंटीन स्थल पर की गई आत्महत्या के बाद प्रशासन चौकन्ना हो गया है। तनाव दूर करने के लिए काउंसलर की ड्यूटी लगाने के मूड में हैं।
शरीर पर असर - बार-बार सिरदर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, थकान, और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव
भावनात्मक असर - चिंता, ग़ुस्सा, डर, चिड़चिड़ापन, उदासी और उलझन हो सकती है।
दिमाग पर असर - बार-बार बुरे ख़्याल आना- जैसे मेरी नौकरी चली गई तो क्या होगा, परिवार कैसे चलेगा, मुझे कोरोना वायरस हो गया तो क्या करेंगे, सही और ग़लत समझ न आना, ध्यान नहीं लगा पाना।
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व्यवहार पर असर - ऐसे में लोग शराब, तंबाकू, सिगरेट का सेवन ज्यादा करने लगते हैं, कोई ज्यादा टीवी देखने लगता है, कोई चीखने-चिल्लाने ज्यादा लगता है, तो कोई चुप्पी साध लेता है।
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