श्रीराम द्वारा रावण की नाभि में तीर मारने के साथ ही रावण धराशायी हो गया। इसके साथ ही बुराई के प्रतीक रावण का पुतला धूं-धूंकर जल उठा। रावण के पुतले के जलने के साथ ही समूचा वातावरण जय श्रीराम के जयघोषों से गुंजायमान हो गया। इस मौके पर आकर्षक आतिशबाजी की गयी।
लाइनपार में आयोजित बाल रामलीला में रावण वध की लीलाओं का आयोजन किया गया। इसमें सबसे पहले रावण का पुत्र नारायण राम-लक्ष्मण के साथ युद्ध करने पहुंचता है, परंतु वह ज्यादा देर तक रामकी सेना केआगे युद्ध के मैदान में टिक नहीं पाता और युद्ध भूमि में धराशायी हो जाता है। इसके बाद अहिरावण युद्ध के लिए मैदान में पहुंचता है। विभीषण द्वारा अवगत कराने पर राम अहिरावण का वध करते हैं। इसके बाद अभिमानी लंकाधिपति रावण अट्टहास करता स्वयं ही युद्ध के मैदान में पहुंचता है। यहां युद्ध में रावण को श्रीराम मार देते हैं। इसके साथ ही चहुंओर श्रीराम की जय-जयकार होने लगती है।