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मुकदमा एक्सपंज करने से क्षुब्ध युवती ने की जान देने की कोशिश, आगरा रेफर

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ट्रामा सेंटर मे भर्ती शंकरपुरी निवासी आरती कठेरिया की मां से पूछताछ करते एसएचओ। - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद/शिकोहाबाद। मारपीट और एससी-एसटी एक्ट में दर्ज मुकदमा को पुलिस द्वारा एक्सपंज करने से क्षुब्ध युवती ने शनिवार रात को घर में साड़ी का फंदा बना कर जान देने की कोशिश की। परिवार की महिलाओं ने उसे नीचे उतारकर जिला अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे आगरा रेफर कर दिया है।
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थाना शिकोहाबाद क्षेत्र के शंकरपुरी निवासी आरती कठेरिया पुत्री राजेश कठेरिया ने पड़ोसी महेश यादव उर्फ टिन्नू पुत्र राजेंद्र सिंह, महेश की बेटी प्राची, निधि, पत्नी कमलेश, पिता राजेंद्र, शायरा बानो पत्नी मोहम्मद सद्दाम उर्फ राज, नूरी, मन्नू पुत्री मोहम्मद राज, आशिया पुत्री सिराज व नीतू पत्नी भाटी के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज करने और एससी-एसटी एक्ट के तहत 12 जून को मुकदमा दर्ज कराया था।
मामले की जांच सीओ शिकोहाबाद अजय सिंह चौहान ने की। जांच के बाद पुलिस ने मुकदमा एक्सपंज कर दिया। शनिवार को इसकी जानकारी आरती को हुई तो वह क्षुब्ध हो गई। पुलिस से न्याय न मिलने पर पीड़िता ने शनिवार रात को कमरे में लगे पंखे से साड़ी का फंदा बनाकर लटक गई। परिजनों ने उसे तुरंत फंदे से उतारा और शिकोहाबाद के अस्पताल ले गए। यहां से उसे फिरोजाबाद सरकारी ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया, परंतु रविवार दोपहर बाद युवती की हालत और खराब होने पर उसे एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रेफर कर दिया।
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पीड़ित परिवार झूठे मुकदमे दर्ज कर सरकारी धन ऐंठने का काम करता है। इन्होंने दो मुकदमे पहले भी दर्ज कराए थे, जिसमें पीड़ित परिवार ने सवा सात लाख रुपये सरकार से मिले थे। पीड़िता के संबंध अपराधी किस्म के लोगों से हैं। पुलिस ने नईम नामक युवक को पांच किलो गांजे में गिरफ्तार किया था। तब पीड़िता की मां अन्य महिलाओं के साथ उसके पक्ष में थाने पर प्रदर्शन करने पहुंची थी। आरती कठेरिया और उसके परिवार ने नईम को बचाने के लिए ही यह सब नाटक किया है।
अजय चौहान, सीओ शिकोहाबाद।
वादिया आरती कठेरिया, उसकी मां द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। सीओ शिकोहाबाद की जांच रिपोर्ट का परीक्षण कराएंगे। जरूरत पड़ी तो दोबारा से विवेचना कर ली जाएगी।
राजेश कुमार सिंह, एसपी देहात फिरोजाबाद।
पुलिस हमारे साथ अन्याय कर रही है। जिन लोगों ने हमारे साथ मारपीट की, उन्हें बचाया जा रहा है। पुलिस लगातार समझौते के लिए दबाव बना रही थी। शनिवार शाम को थाने से मुंशी ने फोन किया था कि केस खारिज कर दिया है। इसके बाद मेरी बेटी कमरे में चली गई और फंदा कस लिया। समय रहते देख लिया और उसे उतार लिया।
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-मंजू कठेरिया, आरती की मां।
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