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सुहागनगरी में लखनऊ से अधिक टैक्स

Tue, 31 Mar 2015 11:30 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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 स्वकर के नाम पर नगर निगम ने जिस मनमाने ढंग से टैक्स (जलकर और गृह कर) का बोझ शहर की जनता पर डाला है उसका सच जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे पाश इलाके गोमती नगर से अधिक टैक्स शहर के उन मोहल्लों पर है जो श्रमिक और मलिन बस्ती में गिने जाते हैं। लखनऊ ही नहीं आगरा, कानपुर, बनारस और अलीगढ़ जैसे महानगरों से अधिक सुहाग नगरी पर टैक्स है। जबकि यहां नगर निगम बने एक साल भी नहीं हुआ है। चौंकाने वाले इन तथ्यों का खुलासा नगर विधायक मनीष असीजा ने एक स्टडी रिपोर्ट में किया है। उन्होंने हरेक महानगर के टैक्सों के गजट की पत्रावली और यहां लगने वाले टैक्सों की पत्रावलियां विधानसभा में रखने के साथ-साथ नगर विकास मंत्रालय को सौंपी हैं।
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नगर विधायक मनीष असीजा ने विस में नगर निगम द्वारा जनता से अधिक टैक्स वसूलने पर कड़ा विरोध दर्ज किया। विधायक ने कहा है कि शासन द्वारा चार अगस्त 2014 को नगर निगम का दर्जा दिया गया है। सात माह जनता को सुविधा के नाम कोई लाभ नहीं मिला। मानक के अनुसार अधिकारी, कर्मचारियों की नियुक्ति भी नहीं हुई। पिछला बोर्ड भंग कर दिया। नगर निगम द्वारा सुविधा देने के बजाये जनता पर स्वकर के नाम पर अनाप-शनाप टैक्स लगाकर जनता का उत्पीड़न किया जा रहा है। लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा, बनारस जैसे नगर निगमों के पाश इलाकों की दरों से अधिक टैक्स लगाया गया है। लाखों रुपये की रिकवरी निकाल कर जनता का उत्पीड़न किया जा रहा है। जनहित में वसूली रोकना आवश्यक है। लखनऊ में गोमती नगर पॉश कालोनियों में गिना जाता है। यहां 12 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर एक रुपये वर्गफुट की दर से टैक्स वसूला जाता है। जबकि फीरोजाबाद नगर निगम द्वारा करबला, दम्मामल नगर, नगला बरी, जाटवपुरी, मोहल्ला गढ़ैया, मोहल्ला गंज, कश्मीरी गेट, नगला विश्नू, तिलक नगर सहित कई संकरे और तंग मोहल्लों में 1.20 से 1.30 रुपये वर्ग फुट की दर से टैक्स थोपा गया है।

प्रमुख सचिव ने नगर आयुक्त से मांगी रिपोर्ट
नगर निगम द्वारा महानगरों से अधिक टैक्स वसूलने के मामले में प्रमुख सचिव एसपी सिंह ने नगर आयुक्त रामऔतार रमन से जनता से वसूले जा रहे टैक्स के संबंध में रिपोर्ट तलब की है।
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हो रहा है विरोध
नगर निगम द्वारा लागू किए जा रहे स्वकर का भाजपा, व्यापारी, सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। जगह-जगह पुतला दहन, सभाएं कर स्वकर को लागू होने से रोकने की मांग की जा रही है।
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