फीरोजाबाद। ओवर प्रोडक्शन और मंदी की मार से उद्योग जगत कराह रहा था तो अब वहीं
ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल ने एक और झटका दिया है। चार दिनों से माल शहर से
बाहर नहीं गया तो कीमतें भी स्थिर हैं। अगले सप्ताह से नवरात्रि और फिर
करवा चौथ, दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार हैं। उससे पहले ही चूड़ी उद्योग
पूरी तरह ठंडा पड़ गया है। उद्यमियों को बाहरी प्रांतों से चूड़ी के आर्डर
और करोड़ों का भुगतान नहीं हो रहा है। सुहाग नगरी से महाराष्ट्र, पंजाब
गुजरात असम और हिमाचल समेत अन्य प्रदेशों में आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
ऐसी स्थिति में उद्यमियों को कारखाने चलाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
नेपाल के रास्ते आना वाला कच्चा माल कारखानों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
सुहागनगरी का कांच उद्योग देश-विदेश में विख्यात है। फीरोजाबाद में बनने वाली कांच की चूड़ियां अपनी एक अलग पहचान रखती हैं। हालांकि महिलाओं की पसंद बदलने और चूड़ी उत्पादन लागत में वृद्धि होने के कारण यह उद्योग रसातल की ओर जा रहा है। जिले में वर्तमान में करीब 125 कांच कारखानों में चूड़ी का उत्पादन किया जाता है लेकिन मंदी की मार से कांच उद्योग पूरी तरह बेहाल है। उत्पादन लागत बढ़ने का ही असर है चूड़ी की क्वालिटी मेंटेन करना मुश्किल हो रहा है। अक्तूबर व नवंबर माह में करवा चौथ एवं दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार हैं, इसके बाद भी चूड़ी उद्योग पूरी तरह मंदी की चपेट में है। पूर्व में त्योहार के सीजन पर 24 घंटे कारखाने संचालित होते थे। वर्तमान में हालात यह हैं कि उद्यमियों को बाहर से आर्डर तक नहीं मिल रहे हैं। उद्यमियों का करोड़ों रुपया बाहरी प्रांतों में फंसा हुआ है। कई कारखानों में सन्नाटा नजर आ रहा है तो कहीं नाममात्र का काम चल रहा है।
घट रहा चूड़ी का बाजार
आधुनिकता के दौर में कांच की चूड़ियों की डिमांड लगातार घटती जा रही है। पूर्व में जहां सुहागिन महिलाएं एक-एक हाथ में 15-20 चूड़ियां पहनती थीं, वहीं अब सिर्फ एक कड़ा पहने नजर आती हैं।
चूड़ी की डिमांड घटने का यह भी प्रमुख कारण
कांच की चूड़ियों की डिमांड घटने का एक प्रमुख कारण मार्केट में प्लास्टिक, जयपुर के कड़े बहुतायत में आ रहे हैं। मैटल चूड़ियों मार्केट में छाई हुई हैं। मैटल से बनी आकर्षक रंग-बिरंगी चूड़ियां व कड़े आज महिलाओं की पहली पसंद हैं।
दो दर्जन से अधिक कारखाने बंदी के कगार पर
सुहागनगरी का कांच उद्योग वर्तमान में तमाम संकटों से जूझ रहा है। मंदी की मार के चलते जहां एक दर्जन कारखाने बंदी की चपेट में आ चुके हैं। वहीं दो दर्जन से अधिक कारखाने धीरे-धीरे बंदी के कगार पर पहुंच रहे हैं। उद्यमियों की मानें तो 15 अक्तूूबर से पांच नवंबर तक शहर में कई कारखाने बंद हो सकते हैं।
143 इकाइयों पर लटकी है एनजीटी की तलवार
सुहागनगरनी का कांच उद्योग प्रदूषण को लेकर भंवरजाल में फंसा हुआ है। आगरा की सेफ संस्था द्वारा हाल में एनजीटी में 89 इकाइयां बंद कराने के लिए याचिका दायर की है। इस मामले में नौ अक्तूबर को सुनवाई होनी है। सुहागनगरी की कुल 143 इकाइयों पर एनजीटी की तलवार लटकी हुई है।
नेपाल आंदोलन ने थामी कांच उद्योग की रफ्तार
फीरोजाबाद। नेपाल में लंबे समय से चल रहे मधेसी आंदोलन ने फीरोजाबाद कांच की रफ्तार को थाम दिया है। आंदोलन के चलते नेपाल से रॉ मैटेरियल नहीं आ पा रही हैं। कारखानों में करोड़ों का तैयार माल फंसा है।
फीरोजाबाद का कांच उद्योग काफी हद तक नेपाल से आने वाले रॉ मैटेरियल पर निर्भर है। उद्यमियों की मानें तो कांच उद्योग के लिए सबसे ज्यादा जरूरी कांच की भंगार, जिसे गला कर कांच बनाया जाता है, उसी कांच से चूड़ियां, ग्लास, बोतल बनाई जाती हैं। सुहागनगरी के प्रत्येक कारखाने में हर रोज 8-10 ट्रक भंगार की खपत होती है। नेपाल से हर रोज काफी संख्या में ट्रकों से भंगार आती है। इसके अलावा सोड़ा व रेता भी आता है। नेपाल से जिन ट्रकों में भरकर रॉ मैटेरियल व अन्य सामान आता है, उन्हीं ट्रकों में वापसी में कारखानों में तैयार माल नेपाल भेजा जाता है। नेपाल में लंबे समय से चल रहे मधेसी आंदोलन के चलते उद्यमी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का भी असर
आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर देश में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल चल रही है। चार दिनों से ट्रकों का पूरी तरह चक्का जाम होने से सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जिले की अधिकांश ट्रांसपोर्ट पर भारी मात्रा में तैयार माल रखा है। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से तमिलनाडू, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश में सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
प्रतिदिन 250 से 300 ट्रकों का होता संचालन
फीरोजाबाद में करीब 500 से 600 ट्रांसपोर्टर हैं। इन ट्रांसपोर्टरों द्वारा प्रतिदिन 250 से 300 ट्रकों का संचालन किया जाता है। इसमें करीब 250 ट्रक खाली शराब की बोतल, 30 से 35 ट्रक कांच के ग्लास व इतने ट्रकों में कांच की चूड़ियां बाहरी प्रांतों को भेजी जाती हैं। फीरोजाबाद ट्रांसपोर्ट मोटर यूनियन के अध्यक्ष सुशील यादव का कहना है कि दिल्ली यूनियन के निर्देश पर चार दिनों से ट्रकों का चक्का जाम किया गया है, जिससे सरकार झुके और हमारी मांगें माने।