फीरोजाबाद। जैन समुदाय के 24वें तीर्थंकर महावीर के वैवाहिक जीवन को लेकर भ्रम की स्थिति है। जैन मत के अनुसार भगवान महावीर बाल ब्रह्मचारी थे, वहीं सरस्वती शिशु मंदिर के पाठ्यक्रम में भगवान महावीर को वैवाहिक बताया गया है। नौनिहालों को गलत जानकारी देने से जैन समाज के लोगों में भी आक्रोश है।
जैन शास्त्र ‘जिनवाणी’ की मानें तो भगवान महावीर बाल ब्रह्मचारी थी। जैन मत के अनुसार, 24 तीर्थंकरों में पांच तीर्थंकरों का विवाह नहंी हुआ था। इन पांचों ब्रह्मचारी तीर्थंकरों को पंच बालयति के नाम से भी जाना जाता है। इनमें भगवान महावीर भी शामिल है। पंच बालयतियों में भी भगवान महावीर को पूजा जाता है। वहीं सरस्वती शिशु मंदिर की कक्षा चार की गौरवशाली भारत भाग-1 की किताब में आज भी बच्चों को शिक्षा जा रही है कि भगवान महावीर का विवाह यशोदा नाम की राजकुमारी से हुआ था, जो कि गलत है। ऐसे में परीक्षा में भी यह प्रश्न विवाद का कारण है।
पंच बालयति में यह हैं पांच ब्रह्मचारी
12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य, 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ, 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ, 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ एवं 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर।
मरसलगंज में लगी है पाषाणकालीन प्रतिमा
मरसलगंज में पाषाणकालीन पंच बलयतियों की प्रतिमाओं में भी भगवान महावीर की प्रतिमा शामिल है। इस तीर्थ की जैन समाज में बेहद मान्यता है। ऐसे मेें नौनिहालों को गलत जानकारी दी जा रही है।
शिशु मंदिर प्रकाशन की है किताब
मथुुरा के मुद्रक ग्राफिक्स आर्ट प्रिंटर्स मथुरा से प्रकाशित सरस्वती शिशु मंदिर प्रकाशन की पुस्तक में भगवान महावीर के वैवाहिक होने का वर्णन किया गया है। कई साहित्यकार इसे गलत इतिहास बता रहे हैं।
इतिहास के कई बिंदुओं पर चर्चा हुई, लेकिन मेरी कॉलेज लाइफ और जॉब लाइफ में यह प्रश्न पहली बार आया है। कई किताबों में लिखा है कि भगवान महावीर की पत्नि यशोदा थी। लेकिन इतिहास को प्रूफ नहीं किया जा सकता है। ऐसा भी कहना गलत होगा कि जैन इतिहास गलत है या किताबें गलत हैं।
डॉ शहरयार अली, इतिहास विभागध्यक्ष
एसआरके महाविद्यालय
जिनवाणी दिगंबर जैन धर्म का प्रमुख ग्रंथ है। जिनमें भगवान महावीर को पंच बलयति लिखा है। लेकिन बच्चों को विवादित चीजें पाठक्रम में पढ़ाई जा रही है। ये गलत है। बच्चों को कोई विवादित प्रसंग नहीं पढ़ाना चाहिए। पहले कई प्रकाशकों ने यह प्रसंग हटा दिया था, लेकिन दो-चार साल से फिर आ गया है।
नरेंद्र प्रकाश जैन, प्राचार्य
जैन विद्वान
काफी साल पहले यह मुद्दा उठा था। ऐसे विवादित मुद्दे बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहिए। वैसे जैन समाज नहीं मानता कि महावीर स्वामी का विवाह हुआ था। लेकिन जिस मुद्दे में भ्रांतियां हों, ऐसे विवादित प्रश्नों को पाठक्रमों से हटा देना चाहिए।
अनूपचंद्र जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता