फिरोजाबाद। रीढ़ की हड्डी में टीबी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे शरीर का निचला हिस्सा निष्क्रिय हो जाता है। मरीजों को कमर दर्द, पैरों में कमजोरी और फालिज जैसे लक्षणों के साथ अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज हो या निजी अस्पताल, हर महीने 2 से 3 नए मरीजों में रीढ़ की टीबी की पुष्टि हो रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, हर दिन तीन से चार मरीज ऐसे आ रहे हैं जिन्हें गंभीर लक्षणों के चलते जांच के लिए भेजा जाता है। न्यूरोसर्जन डॉ. निमित गुप्ता ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में टीबी अब आम समस्या बनती जा रही है, जो नर्वस सिस्टम पर असर डाल रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जो लंबे समय से इलाज करा रहे थे लेकिन जब पैरों से चलना भी मुश्किल हो गया, तब जांच कराई और रिपोर्ट में रीढ़ की टीबी की पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया कि टीबी केवल फेफड़ों तक ही सीमित नहीं है। इन दिनों यह गुर्दे, रीढ़, गर्दन और सिर तक में पहुंच रही है। इन अंगों में टीबी के लक्षण भिन्न हो सकते हैं, लेकिन एक बात समान है शाम को बुखार और वजन का कम होना। उन्होंने चेताया कि अगर समय पर उपचार नहीं कराया गया तो शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह पैरालाइसिस का शिकार हो सकता है।
ये हैं टीबी के मुख्य लक्षण
कमर में लगातार दर्द
शाम के समय बुखार आना
शरीर का वजन तेजी से गिरना
पैरों की मांसपेशियों में कमजोरी
इन बातों का रखें ध्यान
- एक सप्ताह से अधिक खांसी हो तो टीबी की जांच कराएं
- रोजाना शाम को बुखार आने पर सतर्क हों
- वजन में अचानक गिरावट हो तो डॉक्टर से सलाह लें
- सामान्य दवाओं से आराम न मिले तो टीबी की जांच कराएं
- रीढ़, गर्दन या हड्डियों में असहनीय दर्द हो तो जांच जरूर कराएं