कुपोषण की रोकथाम को शासन की ओर से करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है लेकिन सुहागनगरी में इसका असर नहीं दिख रहा। गतवर्ष यहां अतिकुपोषण का शिकार होने वाले बच्चों की संख्या 625 के करीब थी वहीं दिसंबर माह में यह संख्या बढ़कर 845 हो गई है। हालांकि डीएम, सीडीओ सहित कई अफसरों ने गांवों को गोद भी लिया है।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों को सुरक्षित श्रेणी में लाने को हॉटकुक्ड के साथ-साथ धात्री महिलाओं के लिए भी नियमित देखभाल एवं टीका लगाने का काम किया जाता है। इसके बावजूद भी कुपोषण एवं अतिकुपोषण बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से दिसंबर 2014 में आंगनबाड़ी केंद्रों पर 257924 बच्चों का वजन किया। इनमें एक लाख 80 हजार 881 छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे सामान्य श्रेणी के मिले हैं। कुपोषण का शिकार बच्चों की संख्या जिले में 95196 मिली है।
एका ब्लाक में सर्वाधिक 15313 तथा कोटला क्षेत्र में सबसे कम 5074 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं। जसराना में 5862, शहर प्रथम में 6450, शहर द्वितीय में 6593, फीरोजाबाद ग्रामीण क्षेत्र में 5776, अरांव क्षेत्र में 6852, खैरगढ़ में 10402, शिकोहाबाद में 8583, मदनपुर में 11804 तथा टूंडला में 12487 बच्चे कुपोषण का शिकार मिले हैं।
जिले में 845 बच्चे मिले अतिकुपोषित
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के दिसंबर माह में किए सर्वे के अनुसार जिले में 845 बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं। इनमें जसराना 88, शहर प्रथम में 89, शहर द्वितीय 77, ग्रामीण में 158, अरांव में 82, एका में 44, खैरगढ़ में 40, शिकोहाबाद में 53, मदनपुर में 97, टूंडला में 54, कोटला में 63 शामिल हैं।
अतिकुपोषितों का आयुवार विवरण
छह माह तक के 95, छह माह से एक वर्ष के 147, दो वर्ष आयु के 191, तीन वर्ष आयु के 196, चारवर्ष आयु के 110, पांच वर्ष आयु के 85 एवं छह वर्ष आयु के बच्चों की संख्या 21 है।
कुपोषण की रोकथाम को प्रभावी ढंग से कदम उठाए गए हैं, खुद दो गांवों को गोद लिया है, एक-एक बच्चे की मानीटरिंग की जा रही है। जिला स्तरीय अफसरों को गांवों की जिम्मेदारी दी है। शीघ्र ही जिले को कुपोषण मुक्त करने का काम करेंगे।
सुजीत कुमार, सीडीओ फीरोजाबाद।