सिंगापुर की तर्ज पर शहर में फूड स्ट्रीट बनाने के लिए पालीवाल हाल में व्यापार मंडल, ठेल व पथ विक्रेताओं की बैठक बुलाई गई, जिसमें कहां-कहां फूड स्ट्रीट विकसित किए जा सकते हैं, इस संबंध में सुझाव मांगे गए। कुछ स्थानों का डेमो भी दिखाया गया तो कार्यदायी संस्था से अविलंब सर्वे कर चयनित स्थानों का ब्यौरा मांगा गया।
जिला प्रशासन द्वारा सुहाग नगरी में फूड स्ट्रीट की स्थापना करने को कवायद तेज हो गई है। फूड स्ट्रीट की स्थापना के बाद शहरवासी साफ सुथरे वातावरण में स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। वहां निर्धारित मूलभूत सुविधाएं जैसे स्वच्छ पानी, शौचालय, कूड़ा प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था एवं पार्किंग की व्यवस्थाएं होंगी। जहां फूड स्ट्रीट बनेगी वहां 30 मीटर तक नान वैडिंग जोन भी विकसित किया जाएगा। डीएम के निर्देश पर पालीवाल हाल में गुरुवार को बैठक का आयोजन किया गया। सिटी मजिस्ट्रेट रविंद्र सिंह ने व्यापार मंडल, ठेल व पथ विक्रेताओं को योजना के संबंध में विस्तार से ानकारी दी। उन्होंने सभी से सुझाव भी मांगे कि शहर में फूड स्ट्रीट विकसित करने के लिए कहां-कहां स्थान उचित होंगे।
उन्होंने पथ विक्रेता व ठेल वालों के रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन को सौंपी। दरें भी निर्धारित कीं। उन्होंने बताया कि सामान्य श्रेणी के लिए 200, अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के लिए 100 रुपये, महिला के लिए 50 तथा विकलांग व सीनियर सिटीजन से 20 रुपये शुल्क लिया जाएगा। उन्होंने सभी यूनियन पदाधिकारियों से अपील की कि वह योजना के संबंध में सभी व्यापारियों को जानकारी दें। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि फूड स्ट्रीट विकसित करने की जिम्मेदारी नगर निगम, विकास प्राधिकरण व डूडा विभाग की होगी। वहीं पीटीपी (प्राइवेट पब्लिक पार्टनर) के माध्यम से फूड स्ट्रीट विकसित कराने का प्रयास किया जाएगा। नौ दिसंबर के बाद पालीवाल हाल में पुन: बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें पदाधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों पर चर्चा होगी। बैठक में नगर आयुक्त रामऔतार रमन, व्यापार मंडल के पदाधिकारी व ठेल व पथ विक्रेता संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।