फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण के कारण करीब दो साल से बेपटरी शहर का प्रमुख चूड़ी गड्ढा बाजार में अब कारोबारी गतिविधियां तेज हो गई हैं। दीपोत्सव एवं करवाचौथ के नजदीक आने के साथ ही खरीदारी के लिए महिलाओं और बाहरी व्यापारियों की दस्तक से गड्ढा बाजार के दुकानदारों व पथ विक्रेताओं के चेहरों पर मुस्कान लौट आई हैं।
प्रतिवर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले गड्ढा बाजार के दुकानदार और पथ विक्रेताओं के चेहरे पर लंबे अरसे से बाद मुस्कान लौटी है। दीपोत्सव व करवाचौथ के लिए बाहरी जिलों और प्रांतों के व्यापारी गड्ढा बाजार में दस्तक दे रहे हैं।
सस्ते दामों में खरीदारी के लिए मुफीद माने जाने वाले गड्ढा बाजार की अधिकांश दुकानों व पथ विक्रेताओं के फड़ पर कांच, मेटल और गोल्डन पॉलिश की चूडियां चमक बिखेर रही हैं। गड्ढा बाजार में फड़ लगाने वाले पथ विक्रेताओं की मानें तो दो साल बाद पटरी पर लौटी कारोबारी गतिविधियों में वर्ष दीपावली पर 250 करोड़ रुपये के करीब की बिक्री होने की उम्मीद है।
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क्रॉकरी व खेल-खिलौना वालों की भी पौबारह
गड्ढा बाजार में हापुड़ और अन्य शहरों से आने वाले कप प्लेट, खेल खिलौने, अचार रखने वाले पॉट आदि के खरीदार भी मोल भाव करते नजर आ जाते हैं। चीनी मिट्टी के बर्तन विक्रेता साबिर की मानें तो ग्राहक मोल भाव ही नहीं अपनी हैसियत के अनुसार खरीदारी भी कर रहे हैं।
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- हर वर्ष होने वाला चूड़ी कारोबार- लगभग 500 करोड़
- हर वर्ष होने वाला प्लास्टिक कारोबार - लगभग 20 करोड़
- चीन निर्मित बोन चा इना एवं चीनी मिट्ठी का कारोबार- लगभग 05 करोड़
- 2000 पथ विक्रेताओं के अलावा अन्य श्रेणी के करीब 3000 कामगार को मिलता है रोजगार
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दुकानदारों की बात-
दो साल से हाथ पर हाथ रखकर बैठे थे। कई दिनों से व्यापारियों की आवाजाही तेज हुई है। इससे कारोबारी गतिविधियां भी तेज हुई है। उम्मीद है कि इस साल चूड़ी कारोबार पटरी पर आ जाएगा।
राहुल गुप्ता
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गड्ढा बाजार में फड़ और दुकान लगाने वाले 2000 से अधिक फड़ विक्रेता व दुकानदार आजीविका का संकट झेल रहे थे। करवाचौथ और दिवाली के कारण ग्राहक दुकानों पर आ रहे हैं। उम्मीद है कि पिछले साल उठाए घाटा की भरपाई हो सकेगी।
नरेश चंद्र