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श्रीराम कॉलोनी के लोग परेशान, नहीं हो रहा जलभराव का निदान

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फिरोजाबाद। श्रीराम कॉलोनी की गलियों में जलभराव और दलदल की स्थिति। - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। श्रीराम कॉलोनी में रहने वाले लोगों को जलभराव की समस्या से निजात नहीं मिल रही है। कई आंदोलन करने के बाद भी इस कॉलोनी के लोगों की समस्याओं का निदान नहीं हो रहा है। उन्हें बार-बार सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। कॉलोनी के मुख्य रास्ते पर पानी भरा है। सड़कों पर गड्ढे हैं। वहीं, कॉलोनी को नगर निगम सीमा क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इन सारी समस्याओं से तंग आकर क्षेत्र के लोग सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने एडीएम को ज्ञापन देकर समस्याओं के निदान की मांग उठाई। जलभराव से परेशान लोगों ने रविवार को भी प्रदर्शन किया था।
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लोगों के अनुसार श्रीराम कॉलोनी 2005 के आसपास बसी थी। पहले यह क्षेत्र ग्राम सभा की सीमा था। लेकिन परिसीमन के बाद स्थिति ऐसी हो गई कि यह क्षेत्र न तो अबतक नगर निगम शामिल किया गया न ही यह ग्राम सभा का क्षेत्र रह गया। यहां की आबादी कई पांच हजार है। यह क्षेत्र वर्तमान में न नगर निगम सीमा में है और न ही ग्राम सभा की सीमा में। वर्ष 2008 से कॉलोनी के लोग इसे नगर निगम की सीमा में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों ने बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास कराकर शासन को भेज दिया है। लेकिन क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के निस्तारण के लिए नगर निगम ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। क्षेत्र में जलभराव की स्थिति है। नालियां न होने के कारण पानी सड़क पर बने गड्ढों में भर जाता है।
कच्ची हैं गलियां, न बिजली के पोल, न सफाई कर्मचारी
क्षेत्रीय निवासी शिव कुमार राठौर ने कहा कि श्रीराम कॉलोनी का क्षेत्र टूंडला विधानसभा में आता है। कॉलोनी को छोड़कर आसपास के क्षेत्र नगर निगम की सीमा में शामिल हैं। क्षेत्र में कच्ची गलियां हैं, उनमें पानी भरा है, बिजली के पोल भी नहीं है। सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। बीमारियां फैलने का खतरा बना है। इस कॉलोनी में चांदनी बाल बस्ती, हरीनगर, विजय नगर का क्षेत्र भी आता है। रविवार को लोगों ने जिला मुख्यालय में एडीएम को ज्ञापन दिया था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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चार सालों से आश्वासन की खूंटी पर टंगा है समस्याओं का निदान
कॉलोनी को नगर निगम की सीमा में शामिल करने की मांग को लेकर वर्ष 2016 से लोग आंदोलन कर रहे हैं। 26 अप्रैल 2017 को धरना प्रदर्शन किया। 11 मार्च 2018 को भूख हड़ताल की। 15 मार्च 2018 को इच्छा मृत्यु की मांगी। 09 जून 2018 को पूर्व मंत्री एसपी सिंह बघेल ने विकास का आश्वासन दिया था। 22 सितंबर 2019 को क्षेत्र के लोग पेयजल टंकी पर चढ़ गए थे। महापौर के आश्वासन पर दस घंटे के बाद टंकी से उतरे थे। तीन अक्तूबर 2019 को बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ।
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